डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 22, 2025
Culture
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ईश्वर को जानने की हड़बड़ी में हम स्वयं को जानने की ज़रूरत भूल जाते हैं।
वेदांत विश्वास नहीं, अनुभव की बात करता है—मानने की नहीं, घटित होने की।
जो अनुभूति का विषय है, उसे सिद्धांत में बाँध देना शायद सबसे बड़ी भूल है।
शायद परमसत्ता ऊपर कहीं नहीं, उसी चेतना में है जिससे हम प्रश्न पूछ रहे हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 22, 2025
Lifestyle
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श्रीमद्भगवद्गीता का पहला शब्द है “धर्म” और अंतिम “मम” – यानी पूरी कथा इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि “मेरा धर्म क्या है?” धर्म यहाँ मजहब नहीं, हमारे मूल गुण, स्वभाव और जिम्मेदारी का नाम है। जब हम भीड़ और ट्रेंड के पीछे भागकर अपना स्वधर्म छोड़ देते हैं, तब बाहर से सफल दिखकर भी भीतर से खाली रह जाते हैं। गीता हमें सिखाती है कि कर्म पर अधिकार रखो, फल को प्रसाद मानो, अपने स्वभाव के अनुरूप काम करो और आज के आनंदित कर्म में ही सच्ची “सफलता” खोजो।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 15, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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"जब मनुष्य अपने भीतर के ‘मैं’ से जागता है, तभी उसके बाहर का ‘हम’ जन्म लेता है। आत्मबोध से विश्वबोध की यह यात्रा केवल ध्यान या साधना नहीं, बल्कि समरसता, करुणा और दायित्व का जागरण है — जहाँ व्यक्ति स्वयं से उठकर सम्पूर्ण सृष्टि का अंग बन जाता है।"
Sanjaya Jain
Jun 29, 2025
Poems
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यह आत्मपरिचयात्मक कविता एक लेखक के अंतरमन की झलक देती है — जहाँ लेखनी के गुण-दोष, धनहीनता में भी मन की समृद्धि, और समाज को जाग्रत करने की शक्ति निहित है। यह भावनाओं, चेतना और सभ्यता को एक नए रूप में ढालने का आह्वान करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 29, 2020
Fashion,Food and Traveling
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कोरोना काल केवल एक महामारी नहीं था, वह आत्मविश्लेषण का अवसर भी था। आप पेट्रोल बचाकर, नींद पूरी कर, प्रकृति को साँस लेने का मौका देकर और वर्क फ्रॉम होम को सुव्यवस्थित कर बधाई के पात्र हैं। एक ठहराव ने हमें फिर से जीना सिखाया — सादगी से, सहानुभूति से।