क्या लौटाऊंगा ?
डा राम कुमार जोशी
पढ़ाई पूरी होते ही किस्मत कुछ ज्यादा ही अच्छी थी सो बड़ी रेपुटेड कंपनी में ओहदे वाली नौकरी मिल गयी। सब कहते थे कि पुरखों का आशीर्वाद है तो कोई पुराने जन्म के कर्मों को श्रेय दे रहे थे। हमेशा मन लगाकर काम किया और जो भी वेतन मिलता जब-तक मां बाप ज़िन्दा थे उन्हें सौंपा और बाद में पत्नी को। कम्पनी में भी रेपुटेशन बनी ,खूब प्रमोशन भी मिले।
वर्षों बीत गये, साठ साल पूरे होने को आगये थे। बाल कुछ पक कर खिचड़ी हो चुके तो काफी उड़ भी गए।
एक दिन जब अतीत से लेकर आज तक के कर्मों का लेखा लेना शुरू किया तो आंखें विस्फारित सी हो ऐसा महसूस हुआ कि ये क्या? अपने साथ क्या? कमाईं कहां?
जहां ज़िन्दगी भर नौकरी की, उसमें अपना तो सामान कुछ भी नही था। टेबल-कुर्सियां, टेलीफोन,एयर कंडीशनर,सोफे-कालीन आदि अपना कुछ भी नही केवल उपयोग करना हाथ में था। हमेशा आफिस से घर आये तब सब कुछ वही छोड़ आये। हां, महीने के अंत में काम के बदले वेतन यहां से जरुर ले आते रहे।
इसी तरह से जब उम्र पूरी होने पर मृत्यु आयेंगी तो घर-बार पत्नी, बच्चे, रुपये-लत्ते, सबकुछ यहां छोड़ जाना होगा, जैसे आफिस के सामान को प्रतिदिन छोड़ा, तो साथ क्या ले जायेंगे! कम्पनी से तो वेतन तो मिलता था जो घर ले आते थे। भगवान के घर जाने केलिए ज़िन्दगी की कमाईं के रुप में साथ ले जाने वाली कौन सी वस्तु होंगी?
जिस भगवान ने रहने के लिए मुफ्त में धरती, श्वास के लिए हवा, रोशनी के लिए सूर्य, चांद-तारे, घूमने फिरने के लिए स्वस्थ शरीर के साथ अन्न, जल, औषधियां, आकाश, नदियां, समुद्र, पहाड़ न जाने क्या क्या नहीं दिया पर मृत्यु उपरांत सबकुछ यहां छोड़ जाने केलिए। साथ में ले जाने केलिए कुछ भी नहीं।
भगवान को भेंट करने केलिए वेतन रुपी कुछ तो ले जाना ही होगा। वे जरूर पूछेंगे, जैसे यहां पत्नी पूछतीं है।
भगवान को देने केलिए वह वेतन क्या होगा, कैसा होगा और कितना होगा?
साथ में इसको कौन बताएगा?
इन सब विषयों पर चिन्तन तो करना होगा।
ज़िन्दगी तो काफी कुछ निकल गयी, दिनों दिन शरीर भी कमजोर हो रहा है, अब तो जैसे अंधेरा ही अंधेरा शेष रहा है। कोई कहीं से रोशनी का आभास भी हो! बताएं।
ये हम सब आम व ख़ास की कहानी है।
Ram Kumar Joshi
Jun 24, 2026
हिंदी लेख
3 Comments
Comments ( 3)
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राजेश कृष्ण
2 months agoडॉ श्री रामकुमारजी जोशी की रचनाएं विचारोत्तेजक, दिल को छू लेने वाली और प्रेरणास्पद हैं। वे स्वयं भी भावुक, संवेदनशील, सूक्ष्मदर्शी और बौद्धिक क्षमता के धनी व्यक्तित्व हैं।
नारायण खत्री
2 months agoजय हो।
बहुत सटीक बात याद दिलाई है।हमारे बडेरे भी यही कहते चले गये। अब क्या करना है, प्रकाश डालें।
डॉ मुकेश 'असीमित'
2 months agoधन, पद और परिवार सब यहीं छूट जाते हैं। चिंतनपरक लेख ‘क्या लौटाऊँगा?’ पूछता है कि मनुष्य की वह कौन-सी कमाई है, जिसे वह अंतिम यात्रा में अपने साथ ले जा सकता है।