ऊर्जा का आवेशन

Ram Kumar Joshi Apr 2, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“ऊर्जा स्वयं न पाजिटिव होती है न नेगेटिव—वह तो मात्र साधन है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसे साधु साधे या ‘साहिब’ साधे।”

झूठ का मेगा मॉल

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब झूठ ने मार्केटिंग का चोला पहन लिया, तो सच आउटडेटेड घोषित कर दिया गया। “झूठ महा-सेल” में हर वर्ग के ग्राहक उमड़े—नेता, एंकर, धर्मगुरु, कोचिंग संचालक—सब अपने-अपने झूठ के पैकेट खरीदते दिखे। इसी भीड़ में एक बूढ़ा आदमी सच खोजता रह गया…

नेताजी कर्मदास की कैंची लीला

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

नेताजी कर्मदास की राजनीति जनसेवा से नहीं, फीता-कटिंग से संचालित होती है। कैंची उनकी पहचान है और उद्घाटन उनका धर्म। लेकिन जब बाबा धर्मदास ने उनकी जगह ले ली, तो नेताजी के राजनीतिक अस्तित्व पर ही कैंची चल गई।

आज रपट जाएँ तो हमें न उठइयो

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।

नाम में क्या रखा है? — बहुत कुछ रखा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“आजकल आपका नाम वो नहीं होता जो माता-पिता ने रखा था, बल्कि वो होता है जो किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपने मोबाइल में सेव कर रखा है… और तभी आप डॉक्टर से सीधे ‘HD Wallpaper’ बन जाते हैं।”

संवेदना , में छिपी अपनी वेदना !

Prem Chand Dwitiya Mar 16, 2026 व्यंग रचनाएं 1

आज के सार्वजनिक जीवन में संवेदना भी एक सार्वजनिक प्रदर्शन बन गई है। किसी की पीड़ा कम हो या न हो, पर फोटो, पोस्ट और लाइक-शेयर की दुनिया में संवेदना का बाजार खूब गर्म है। यह व्यंग्य उसी विडंबना को पकड़ता है जहाँ असली वेदना से ज्यादा महत्व संवेदना की तस्वीरों को मिल जाता है।

राष्ट्रीय गधा पालन योजना

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 12, 2026 व्यंग रचनाएं 0

सरकार की पशुपालन योजना में गाय-भैंस को तो जगह मिल गई, पर गधे को अभी भी पहचान का इंतजार है। गधा गणना में घटती संख्या ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इस व्यंग्य में गधा संरक्षण, पति पंजीकरण और पड़ोसी देशों की गधाग्राही अर्थव्यवस्था के बहाने समाज और व्यवस्था पर हल्का-फुल्का कटाक्ष किया गया है।

पटिया संस्कृति का पटाक्षेप !

Prem Chand Dwitiya Feb 24, 2026 व्यंग रचनाएं 0

कभी पटिए पर बैठकर शहर की राजनीति, समाज और संस्कार तय होते थे; अब वही चर्चाएँ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की स्क्रीन पर सिमट गई हैं। पटिया संस्कृति का यह पटाक्षेप समय की विडंबना है।