ऊर्जा का आवेशन
डा राम कुमार जोशी
आजकल आमजन में छाये रहने के लिए नये नये शगूफे बना कर विविध तरीके से पेश करने में हमारे साहिब माहिर हो गये हैं। ऐसा ही एक अंग्रेजी दा महाशय को कहते सुना कि यदि इस ओउम् का उच्चारण करते है तो आपके शरीर में बड़ी पाजिटिव एनर्जी उत्पन्न हो जायेगी। मुझे आजतक समझ नही आया कि एनर्जी पाजिटिव या नेगेटिव कैसी होती है। एनर्जी तो मात्र कार्य करने के लिए आवश्यक साधन है। उसका उपयोग करने वाला सत, रज या तम प्रकृति का है या जिस संस्कार का है, वैसा ही उपयोग करेगा।उसका परिणाम पाज़िटिव या नेगेटिव हो सकता है।
जैसे महाभारत काल में कौरव व पाण्डव दोनों ही ताकतवर थे, उर्जावान थे। एक पक्ष सात्विक संस्कार युक्त था अन्य तामस प्रवृत्ति से लबरेज था। सात्विक भाव जीत गया।
पाजिटिव व नेगेटिव तो बिजली के सैल में होते है और जिनके मिलने से ही धारा बहती है।
ओउम् को ठीक जानते नही। अकार, उकार व मकार की समझ नही, उच्चारण कैसे किया जाता है, पता नही। जैसे एक चूहा सौठ का गठिया ले खुद को पंसारी कह देता है। इनकी हालतें वैसी है। अंग्रेजी भाषा में वेद- वेदांग, उपनिषद युक्त भारतीय संस्कृति को कभी नहीं समझाया जा सकता है क्योंकि अंग्रेजी में उनके समान अर्थों वाले शब्द ही नहीं है या पर्याय शब्द ही नहीं है । जैसे उदाहरण रुपी योग, प्राणायाम, आज्ञा चक्र, सत्व रज तम समाधि परमेष्ठी आदि। भारतीय शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने केलिए संस्कृत का ही ज्ञान होना चाहिए। अनुवाद सार्थक नहीं होगा।
फिर ऐसे अंग्रेजी नुमा लोग स्वयं को ज्ञानी ध्यानी सिद्ध करने के लिए ऐसे शब्दों की रचना कर मात्र बेवकूफ बनाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे गलत व्याख्या वाले लोगों से सावधान रहना चाहिए।
डा राम कुमार जोशी
बाड़मेर, राजस्थान
Ram Kumar Joshi
Apr 2, 2026
व्यंग रचनाएं
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