डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 13, 2025
व्यंग रचनाएं
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मैं, अंग्रेज़ी दवा लिखने वाला डॉक्टर, अब हिंदी में लिखने लगा तो शहर के ‘हिंदी प्रहरी’ गुरुजी मेरी हर पोस्ट में बिंदी-अनुस्वार ढूंढते फिरते हैं। फेसबुक की वॉल अब क्लासरूम बन गई है—खद्दर कुर्ता, झोला, फाउंटेन पेन और ‘हिंदी की टूटी टांग’ का स्थायी दर्द। मैं त्रिशंकु-सा, हिंग्लिश और देसी मुहावरे के बीच लटका, गूगल इनपुट से जूझता, फिर भी लिखने की खुजली शौक से खुजाता हूँ। बेखौफ़, मुस्कुराते हुए.
Ram Kumar Joshi
Sep 12, 2025
व्यंग रचनाएं
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मोगली सल्तनत का दरबार दो सदियों के बीच झूला झूलता है—एक ओर शाही खंजर, सुराही, घूंघरू; दूसरी ओर जींस, बीयर, पिज़्ज़ा और जिम। बादशाह की नीतियाँ अख़बारों से सीखी गईं, शहज़ादा सलीम ‘हैलो डैड’ कहकर बगावत की सूचना कुरियर से देता है। नर्तकी का ग्लास सिंहासन तक पहुँचता है, तलवारें जंग खाती हैं और घोड़े बेरोज़गार। सत्ता का तख़्त अंततः नृत्य-मंच में बदल जाता है—और जनता तमाशा देख हँसती।
Ram Kumar Joshi
Sep 5, 2025
हिंदी कविता
1
डा. राम कुमार जोशी की यह हास्य-व्यंग्य रचना "खर्राटा संगीत" वैवाहिक जीवन की हल्की-फुल्की खटास-मीठास को चुटीले अंदाज़ में पेश करती है। इसमें पत्नी के खर्राटों को संगीत की तरह रूपायित कर बांसुरी, ढोल और खर्र-खर्र की ध्वनियों से जोड़ते हुए विनोदी चित्र खड़ा किया गया है।
Mahadev Prashad Premi
Sep 4, 2025
Book Review
3
यह संग्रह महादेव प्रसाद ‘प्रेमी’ की कुण्डलियों का संकलन है, जिसे डॉ. मुकेश असीमित ने संपादित व प्रस्तुत किया है। इसमें प्रत्येक कुण्डली के साथ चित्रात्मक अभिव्यक्ति जोड़ी गई है। यह प्रयास लोकविधा कुण्डलिया को पुनर्जीवित करते हुए पाठकों तक उसकी लय, रस, हास्य और नीति का संपूर्ण अनुभव पहुँचाता है।
Ram Kumar Joshi
Sep 3, 2025
व्यंग रचनाएं
2
During a saint’s sermon on life’s impermanence, a villager asked the meaning of "Late" written before names after death. His friend explained—Englishmen are buried, so they keep lying in graves, hence "Late." For us, it’s "Swargiya," since we go to heaven. Their talk outshone the sermon’s seriousness
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 2, 2025
व्यंग रचनाएं
2
डिजिटल युग की हंसी अब मुँह से नहीं, मोबाइल से निकलती है। पिता ‘LOL’ सुनकर असली हंसी देखना चाहते हैं, जबकि बेटा ‘BRB’, ‘ROFL’, ‘IDK’ जैसे कोड में ही भावनाएँ व्यक्त कर देता है। व्यंग्य यह है कि असली संवाद खो गया है और अब हंसी भी इमोजी व शॉर्टकट पर आउटसोर्स हो गई है। यही है हमारी पीढ़ियों का नया “लाफ्टर क्लब”—ऑनलाइन!
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 30, 2025
Blogs
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मरीज की असली तकलीफ़ टूटी हुई हड्डी नहीं, बल्कि टूटा हुआ घर-गृहस्थी का संतुलन है। डॉक्टर जब पक्का प्लास्टर लगाने का हुक्म सुनाता है तो लगता है जैसे घर में आपातकाल लागू कर दिया हो। मरीज की गुहार–“डॉक्टर साहब, घर में कोई काम करने वाला नहीं!”–अब डॉक्टर के लिए नए बिज़नेस का आइडिया बन चुकी है। बेसिक, गोल्डन और प्रीमियम पैकेज समेत!
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 23, 2025
व्यंग रचनाएं
5
“मैं और मेरा मोटापा – एक प्रेमकथा” में तोंद और इंसान का रिश्ता मोहब्बत जैसा दिखाया गया है। पड़ोसी शर्मा जी की खीझ, रिश्तेदारों की चेतावनी, सरकार की घोषणाएँ—सब बेअसर! मोटापा हर वक्त साथ है, जैसे जीवन-संगिनी। चेतावनी बोर्ड उखाड़कर समोसे खाने की जिद और गोल फिगर को भी गौरव मानना—यह व्यंग्य सिर्फ़ शरीर नहीं, पूरे समाज की मानसिकता पर कटाक्ष है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 22, 2025
व्यंग रचनाएं
3
भागम-भाग की ज़िंदगी का असली गणित है—भाग को भाग दो, और उत्तर आएगा ‘आराम’। खाट पर लेटना, कम्बल में दुनिया की फिक्र लपेटना ही असली दर्शन है। काम दुखों की जड़ है, पर आराम में पहले से ही राम बसे हैं। खरगोश दौड़ता है, कछुआ जीतता है, क्योंकि वो आराम से चलता है। तो मेरी मानो—खाट बिछाओ, पैर फैलाओ और कलयुग के मोक्ष ‘आराम’ का आनंद लो।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 21, 2025
व्यंग रचनाएं
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सरकारी दफ़्तरों की असलियत पर यह व्यंग्य कटाक्ष करता है—जहाँ अफ़सर तनख़्वाह तो छुट्टियों की लेते हैं, पर काम के नाम पर बहानेबाज़ी ही उनका असली हुनर है। दफ़्तर का बोर्ड "साहब अवकाश पर हैं" एक स्थायी सच बन चुका है। अवकाश-प्रेम की यह आदत अब दफ़्तर की गलियों में लोककथा बन गई है, जहाँ छुट्टियाँ ही मोक्ष हैं और काम केवल ‘सुविधा शुल्क’ से जुड़ा हुआ कर्म।