टैंकर देखकर प्यास बुझाओ

Pradeep Audichya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

"टैंकर देखकर प्यास बुझाओ" प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रदीप औदिच्य की एक मार्मिक और तीखी व्यंग्य रचना है, जिसमें ग्रामीण भारत की जल समस्या, सरकारी विभागों की लालफीताशाही, कागजी विकास, हैंडपंपों की दुर्दशा और फोटो-आधारित राजनीति पर करारा कटाक्ष किया गया है।

लोकसमाज ने मकर संक्रांति को एक दिन का उत्सव नहीं,बल्कि सामूहिक भावबोध का पर्व बनाया

Priyanka Ghumara Jan 12, 2026 Culture 0

“यह पर्व केवल मौसम नहीं बदलता, जीवन की दृष्टि बदलता है।” “लोहड़ी संघर्ष के बाद आने वाली राहत और संभावना का लोकउत्सव है।” “लोकपर्वों की सादगी ही उनकी सबसे बड़ी सुंदरता है।” “परंपरा तब जीवित रहती है, जब वह समय से संवाद करती है।”