बालम, आवो हमारे गेह रे—भीतर बसे प्रियतम की खोज का कबीर निर्गुण भजन

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 25, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

भागती जिंदगी, रिश्तों की भीड़ और उपलब्धियों के बीच मन क्यों सूना रह जाता है? पढ़िए और सुनिए कबीर-भाव से प्रेरित लोक–सूफ़ी भजन “बालम, आवो हमारे गेह रे” की आत्मिक यात्रा।