लोकतंत्र की गाड़ी चल पड़ी, पम पम पम!

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 7, 2025 Blogs 0

लोकतंत्र की गाड़ी पम-पम-पम करती आगे बढ़ रही है—टायरों में हवा नहीं, पर वादों की फुलावट है। ड्राइवर बूढ़ा है पर जीपीएस नया, जो सिर्फ उसी की सुनता है। जनता सीट बेल्ट बाँधकर सफ़र का आनंद ले रही है—मंज़िल का सपना है ‘2047 का भारत’। इंजन पुराने भाषणों से गरम है, और भोंपू झूठे वादों का गान गा रहा है।

संस्था का स्वयंवर: ‘योग्यता’ नहीं, ‘जुगाड़’ की वरमाला!

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 30, 2025 व्यंग रचनाएं 6

संस्था अब कोई विचारशील मंच नहीं, एक शर्मीली दुल्हन बन चुकी है, जिसका स्वयंवर हर दो साल बाद होता है। यहां वरमाला योग्यताओं पर नहीं, जुगाड़ और सिफारिशों पर डाली जाती है। मंच सजे हैं, दूल्हे कतार में हैं—किसी के पास डिग्री, तो किसी के पास 'ऊपर' तक पहुंच। पढ़िए, जब संस्था के मंडप में लोकतंत्र लपका बनने निकल पड़ा!

मुफ्त की सलाह -मुफ्त का चन्दन घिस मेरे लाल

डॉ मुकेश 'असीमित' May 22, 2024 व्यंग रचनाएं 0

कंसल्टेंसी का व्यवसाय तेजी से फल-फूल रहा है, चाहे वो फाइनेंशियल, टैक्स, लीगल, स्टॉक मार्केट, कंपनी, या ज्योतिष कंसल्टेंट हों। पर क्या आप सोच सकते हैं, इस देश में जहाँ हर गली-मोहल्ले में मुफ्त सलाह मिल जाती है, कोई सलाह देने का भी व्यवसाय कर सकता है? यहाँ हर कोई खुद को किसी भी विषय का एक्सपर्ट मानता है और मुफ्त में सलाह देने को तत्पर रहता है। "भैया, ये डिग्री की बात नहीं, अनुभव की बात है।" इस तकीया कलाम के साथ आपको ऐसे सलाहकार हर जगह मिलेंगे, जो अपनी सलाह की गारंटी और वैलिडिटी बताते नहीं थकते। चाहे आप घर में हों, दफ्तर में, बस-ट्रेन में या रास्ते में, ये सलाह देने के लिए तैयार रहते हैं। क्या आप भी इन मुफ्त के रायचंदों के अनुभवों से गुजर चुके हैं? जानिए ऐसे ही दिलचस्प अनुभवों और सलाहकारों की कहानियाँ हमारे ब्लॉग "बात अपने देश की" पर। पूरा लेख पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें।