वंदे मातरम् : सरल हिंदी में मातृभूमि की वंदना

वंदे मातरम् : सरल हिंदी में मातृभूमि की वंदना

रचना एवं संगीत प्रस्तुति : डॉ. मुकेश असीमित

भारत की स्वतंत्रता चेतना को स्वर देने वाला अमर गीत ‘वंदे मातरम्’ महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अनुपम रचना है। इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में सम्मिलित किया गया था। यह गीत केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति प्रेम, श्रद्धा, समर्पण और राष्ट्रीय स्वाभिमान की सशक्त अभिव्यक्ति है। इसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान असंख्य देशवासियों और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया।

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान होगा और स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को उसके समान सम्मान तथा समान दर्जा प्राप्त होगा।

मूल ‘वंदे मातरम्’ की भाषा संस्कृतनिष्ठ और काव्यात्मक है। उसके अनेक शब्द आज के सामान्य पाठक एवं नई पीढ़ी के लिए कुछ कठिन प्रतीत हो सकते हैं। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मूल रचना के भाव, मातृभूमि की महिमा और राष्ट्रीय चेतना को सरल हिंदी भाषा में प्रस्तुत करने का यह एक विनम्र रचनात्मक प्रयास है।

यह मूल राष्ट्रीय गीत का विकल्प अथवा शब्दशः अनुवाद नहीं, बल्कि उसकी मूल भावना से प्रेरित सरल हिंदी भावानुवाद एवं गीतात्मक रूपांतरण है। इसे डिजिटल संगीत माध्यम से संगीतबद्ध भी किया गया है, ताकि मातृभूमि की यह पावन वंदना सरल शब्दों और मधुर स्वरों के माध्यम से अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुँच सके।


वंदे मातरम्

सरल हिंदी भावानुवाद एवं गीतात्मक प्रस्तुति

[आलाप / Chorus]
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
माँ… माँ…
हे माँ… मेरी माँ…


[मुखड़ा]
जल से भरी, फल से भरी,
शीतल पवन का आँचल।
खेतों में हरियाली खिलती,
सोना उगले हर एक पल।
जल से भरी, फल से भरी,
ममता वाली मातरम्।
तेरी मिट्टी, तेरी खुशबू,
तुझको नमन—वंदे मातरम्।
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…


[अंतरा 1]
चाँदनी रातें ओढ़े चुनर ,
नदियाँ गीत सुनाती हैं।
फूलों वाली डाली-डाली,
तेरी शोभा गाती है।
मुस्काती तू, मीठी बोली,
मन में मधुरस प्यार भरे।
सुख भी देती, बल भी देती,
जीवन में उजियार भरे।
हे सुख देने वाली माँ,
हे वर देने वाली माँ,
तन-मन अर्पण मातरम्,
वंदे मातरम्… वंदे मातरम्।


[Hook]
माटी की महक में माँ तू,
मन की मधुर पुकार।
तेरा नाम जपे हर धड़कन,
तू ही जीवन-सार।
वंदे मातरम्…वंदे मातरम्…


[अंतरा 2]
करोड़ों कंठों से गूँज रहा,
तेरी जय-जयकार।
करोड़ों हाथ उठे माँ तेरे,
रक्षा को तैयार।
कौन कहे माँ तू निर्बल है?
तू शक्ति की खान।
तेरे बेटे, तेरी बेटियाँ,
तेरे लिए कुर्बान।
बल की धारा, भक्ति की धारा,
तू ही जीवन-धार ।
दुख हरने वाली माँ मेरी,
शत्रु-हरण अवतार।
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…


[अंतरा 3]
तू ही दुर्गा, साहस वाली,
अन्यायों से लड़ने वाली।
तू ही लक्ष्मी, अन्न-धन देती,
घर-आँगन को भरने वाली।
तू ही सरस्वती बनकर माँ,
ज्ञान की ज्योति जलाती है।
अंधियारे मन में आशा की,
नई सुबह ले आती है।
तुझको नमन, शत-शत नमन,
पावन, निर्मल, प्यारी माँ।
जल-फल वाली, जन-मन वाली,
जन-जन की दुलारी माँ।
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…


[अंतरा 4 / उत्कर्ष]
काली मिट्टी, पीली धरती,
लाल लहू की लाज है तू।
जन-जन के माथे की बिंदी,
भारत माँ का ताज है तू।
मधु मुस्कान, मधुमय वाणी,
स्नेह सुधा बरसाती माँ।
धरती बनकर धीरज देती,
अंबर बन समझाती माँ।
तेरे वन, तेरी नदियाँ माँ,
तेरे पर्वत, तेरे धाम।
तेरे कण-कण में बसता है,
हम सबका अभिमान।


[Final Chorus]
जल से भरी, फल से भरी,
ठंडी पवन का आँचल।
खेतों में हरियाली खिलती,
धानों की बाली चंचल।
माँ तू सीधी, माँ तू सच्ची,
माँ तू जीवन-धाम।
तुझसे उजियारा जग सारा,
तुझसे अपना नाम।
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
वंदे मातरम्…
माँ… माँ…
हे माँ… मेरी माँ…
वंदे मातरम्।


संगीतबद्ध गीत सुनें

इस सरल हिंदी भावानुवाद को डिजिटल संगीत माध्यम से भावपूर्ण गीत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसकी संपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति सुनने के लिए हमारे YouTube चैनल “Dr. Mukesh Aseemit Creations” पर जाएँ।

गीत की YouTube लिंक नीचे दी गई है।

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वंदे मातरम्!
भारत माता की जय!

प्रस्तुति : डॉ. मुकेश असीमित
वेबसाइट : बात अपने देश की
YouTube : Dr. Mukesh Aseemit Creations

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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