खाली वायदों का कार्ड: मुफ्त इलाज की राजनीति और अस्पतालों की त्रासदी

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 20, 2026 Health And Hospitals 0

“कार्ड हाथ में है, भरोसा दिल में है—लेकिन इलाज फाइलों में अटका हुआ है। ‘खाली वायदों का कार्ड’ एक ऐसा व्यंग्य है जो स्वास्थ्य योजनाओं के पीछे छिपी सच्चाई को बेनकाब करता है।”

प्राइवेट अस्पतालों का एनकाउंटर

Dr Rajshekhar Yadav Jul 2, 2025 Blogs 0

प्राइवेट अस्पतालों पर लूट के आरोप लगाने से पहले समाज को याद रखना चाहिए कि हमने ही इन्हें 'उपभोक्ता वस्तु' बना दिया। जिस प्रोफेशन पर सबसे ज़्यादा कानून लागू हों, जहां हर चूक पर जुर्माना लगे, और फिर भी हम मुफ्त सेवा की अपेक्षा करें — क्या ये किसी एनकाउंटर से कम है?

मेडिकल का आँचलिक भाषा साहित्य – बिंब, अलंकारों, प्रतीकों से भरपूर

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 8, 2025 Blogs 1

"डॉक्टर साहब, आपकी पढ़ाई अपनी जगह… हम तो इसे 'नस जाना' ही मानेंगे!" ग्रामीण चिकित्सा संवादों में हर लक्षण का एक लोकनाम है — 'चक चली गई', 'हवा बैठ गई', 'गोड़ा बोल गया', 'ऊपर की हवा का असर है'। ये केवल शब्द नहीं, एक पूरी चिकित्सा-व्याख्या है, जिसमें विज्ञान, विश्वास और व्यंग्य की त्रिवेणी बहती है। गाँव के मरीज डॉक्टर से नहीं, खुद अपनी बीमारी का निदान लेकर आते हैं। इस लेख में इन्हीं रंग-बिरंगे अनुभवों, प्रतीकों और मुहावरों के ज़रिए एक लोक-चिकित्सा संस्कृति का हास्य-चित्रण किया गया है।