नाम में क्या रखा है? — बहुत कुछ रखा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“आजकल आपका नाम वो नहीं होता जो माता-पिता ने रखा था, बल्कि वो होता है जो किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपने मोबाइल में सेव कर रखा है… और तभी आप डॉक्टर से सीधे ‘HD Wallpaper’ बन जाते हैं।”

पटिया संस्कृति का पटाक्षेप !

Prem Chand Dwitiya Feb 24, 2026 व्यंग रचनाएं 0

कभी पटिए पर बैठकर शहर की राजनीति, समाज और संस्कार तय होते थे; अब वही चर्चाएँ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की स्क्रीन पर सिमट गई हैं। पटिया संस्कृति का यह पटाक्षेप समय की विडंबना है।

टिकट विंडो की लाइन : व्यंग रचना -डॉ मुकेश गर्ग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 17, 2024 व्यंग रचनाएं 0

“रेलवे की लाइनों में जीवन के उतार-चढ़ाव की गाथा: प्रौद्योगिकी और व्यवहार की चुनौतियों के बीच, सामाजिक चेहरा और व्यक्तिगत जद्दोजहद का आईना।” रेलवे के टिकट विंडो की लाइन में लगा हुआ हूँ, रेल यात्रियों के बढ़ते दबाव से परेशान होकर और अमृत योजना के बजट का कुछ अंश खर्च करके टिकट विंडो का चौड़ीकरन […]