शांतिपूर्ण और प्रगतिशील विश्व के निर्माण में भारत की हो सकती हैं महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ मुकेश 'असीमित' May 9, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

आज का विश्व गहरे संकटों और विभाजनों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक अनुभव, संतुलित विदेश नीति और युवा शक्ति के कारण विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह लेख विश्व निर्माण में भारत की संभावित और आवश्यक भूमिका का विश्लेषण करता है।

क्या हम कृत्रिम मेधा के प्रयोग से उत्पन्न संकटों के लिए तैयार हैं?

Dr Shailesh Shukla Apr 20, 2026 Science Talk (विज्ञान जगत ) 1

कृत्रिम मेधा (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने समाज, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। यह लेख एआई से उत्पन्न संकटों—डीपफेक, रोजगार पर प्रभाव, एल्गोरिथमिक बायस, स्वायत्त हथियारों और पर्यावरणीय जोखिमों—का गहन विश्लेषण करता है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या हम इसके लिए तैयार हैं।

युद्धोन्माद, बाज़ार और डीप स्टेट : सभ्यता के कगार पर खड़ी मानवता

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 समसामयिकी 0

“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।” “जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।” “हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।” “इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”

बीता साल: घटनाओं का नहीं, प्रतिक्रियाओं का इतिहास

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 27, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

यह साल किसी कैलेंडर की तरह नहीं बीता, बल्कि अधूरी डायरी की तरह—जहाँ स्याही कम और धड़कन ज़्यादा थी। घटनाएँ बदलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा बदले हमारे डर, ग़ुस्सा और चुप्पियाँ। यह साल हमें किसी नतीजे तक नहीं लाया, बल्कि सवालों की लंबी सूची सौंप गया—कि हम क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं और कब चुप रहते हैं। आतंक, युद्ध, आस्था, कॉमेडी, सोशल मीडिया—हर मोर्चे पर यह साल हमें भीतर तक झकझोरता रहा। इतिहास बनता रहा, और हम बदलते रहे।