हनुमान जी का नामांकन और जाति का कॉलम
जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।
जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।
हनुमान जयंती पर प्रस्तुत यह लेख हनुमान जी के पराक्रम से आगे बढ़कर उनके भक्ति, विश्वास और आंतरिक शक्ति के स्वरूप को समझने का प्रयास है—जहाँ हर मनुष्य के भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने का संदेश मिलता है।