गालों की लाली- हो गई गाली

Ram Kumar Joshi Oct 20, 2025 संस्मरण 0

“कभी सूर्योदय से पहले नहीं उठने वाले अब मुंह-अंधेरे ‘हेलो हाय’ करते जॉगिंग पर हैं। ट्रैक सूट, डियोडरेंट और महिला ट्रेनर ने जैसे रिटायरमेंट में नई जवानी फूंक दी हो। पर पत्नी का वीटो जब लगा, तो प्रभात भ्रमण से सीधा ‘लिहाफ भ्रमण’ पर लौटे।”

“मजे की राजनीति: भारतीय जीवन का मस्ती भरा दर्शन”

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 14, 2024 व्यंग रचनाएं 2

भारतीय आम आदमी की ज़िंदगी में काम नहीं, मज़ा ज़रूरी है। वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स उसे नहीं समझ पाया — लेकिन वो तो मस्ती के लिए जीता है! नेताओं के भाषण हों या सरकारी घोषणाएं, सब कुछ ‘मजा आया की नहीं?’ से तय होता है। यही तो असली लोकतंत्र है – मजेदार लोकतंत्र!