डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 1, 2026
ललित निबंध
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चिट्ठियों का वह दौर, जब नीली स्याही में रिश्तों की गर्माहट होती थी, डाकिए का इंतज़ार एक उत्सव होता था और एक काग़ज़ पूरे घर की खुशबू साथ ले आता था। आज की तेज़ डिजिटल दुनिया में आइए याद करें चिट्ठी-पाती के उसी आत्मीय ज़माने को।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 12, 2026
India Story \बात अपने देश की
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आशा भोंसले की आवाज़ केवल संगीत नहीं थी, वह समय की धड़कन थी। उनके जाने की खबर एक युग के अवसान जैसी है, लेकिन उनके गीत आज भी हर भावना में जीवित हैं।
Prahalad Shrimali
Nov 26, 2025
हिंदी कविता
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साठ साल का आदमी दरअसल चलता-फिरता पेड़ है—अनुभव की जड़ों में धँसा, सद्भाव की शाखों से भरा और भीतर अब भी एक प्यारा बच्चा लिये हुए। उसकी बातें कभी जुगाली लगती हैं, पर उनमें समय का सच और जीवन का रस बहता है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 26, 2025
Blogs
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“सिनेमाघर कभी मनोरंजन का देवालय था, जहाँ चाय-कुल्फी की आवाजें, तंबाकू की पिचकारियाँ, आगे की सीटों की रुई निकालने की परंपरा और इंटरवल का महाभारत—सब मिलकर एक सामूहिक उत्सव बनाते थे। वह जमाना गया, जब फिल्में हमें हमारी रियलिटी से कुछ पल उड़ा ले जाती थीं।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 20, 2025
Poems
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भाषा और मेरा रिश्ता महज़ शब्दों का नहीं, स्मृतियों, संवेदनाओं और सांसों का जीवित संगम है। यह कभी जेब में रखी पुरानी चिट्ठी की तरह महकती है, कभी अँधेरे में लालटेन बन जाती है। भाषा मेरे लिए दिशा है, धड़कन है, और दिन-रात साथ बहती आत्मा का संगीत।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 2, 2025
English-Write Ups
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Forty years ago, happiness was cheap. A stick could be toy, antenna, and mango-harvesting tool. A single roll of cloth dressed the whole family—eventually turning into bags and mops. Doordarshan’s Ramayan was a divine weekly event, while sugar toys were both playthings and sweets. Today, despite endless gadgets and choices, smiles feel mortgaged. The old equation still rings true: fewer resources, more joy; more resources, less joy.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 19, 2025
Fashion,Food and Traveling
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On World Photography Day, I look back at my 12-year journey—from a compact birthday gift camera to chasing birds at Ranthambhore and Ghana. Those days of patience, setups, and waiting for the perfect shot feel magical now, in contrast to today’s AI blur where real and generated frames look alike.
Vidya Dubey
Aug 12, 2025
Poems
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मेरे घर की दीवारें सिर्फ दीवारें नहीं, वे मेरी जिंदगी की साक्षी हैं। उन्होंने मुझे नाचते-गाते, रोते, सपने बुनते, सपनों के टूटने पर टूटते, झगड़ते, मिलते-जुलते देखा है। वे मन का मरोड़, दिल का शोर और भीतर उगते अनचाहे खरपतवार तक देख चुकी हैं।
Wasim Alam
Aug 10, 2025
कहानी
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गाँव का आधा-अधूरा घर, जहाँ कभी ढोलक की थाप और हँसी गूँजती थी, अब दो चूल्हों की दूरी में बँट चुका है। नशे, गरीबी और कटुता ने आँगन की मिट्टी से खुशबू खींच ली है। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, सैकड़ों बिखरे घरों की गवाही है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 4, 2025
Poems
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समय की धारा में बहते हुए रिश्तों का यह मार्मिक चित्रण है — जहाँ कभी हँसी-ठिठोली, सपनों की साझेदारी और चाय की चौपाल थी, वहाँ अब दिखावटी पोस्ट और व्यस्तताएँ हैं। 'दोस्त बदल गए हैं यार' न केवल एक वाक्य है, बल्कि एक पीढ़ी की सामूहिक टीस है, जो अपनी जड़ों की तलाश में आज भी पलटकर देखती है।