डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
संस्मरण
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हॉस्टल की 'थ्रिल भरी' दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा पहुँचने की जुगत भिड़ाता है। कभी पचास के खुले न मिलने की मजबूरी, कभी टीटी से आँख-मिचौली, तो कभी जनरल डिब्बे में ‘इंच भर की सीट’ पर संतुलन साधना — हर दृश्य हास्य से लबरेज़ है। डर की कई 'किश्तों' के बीच चलती ट्रेन में 'किक' का अहसास, और आखिर में स्टेशन पर छलांग मारकर जीत का रोमांच। एक बेधड़क, बेपरवाह, लेकिन दिलचस्प रेल यात्रा — सिर्फ़ व्यंग्य की भाषा में!
Uttam Kumar
Jul 3, 2025
Poems
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इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2024
व्यंग रचनाएं
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इतिहास से जुड़ी कुछ मजेदार घटनाओं और स्कूल के दिनों की हंसी-मजाक पर आधारित है। कैसे हमारे शिक्षक 'मारसाहब' क्लास में सो जाते थे और हम इतिहास की किताबों से बचने की कोशिश करते थे, आज का वर्तमान, इतिहास के परिपेक्ष्य में कुछ विसंगतियां का चित्रण करने का प्रयास ।
पूरा लेख पढ़ने के लिए "बात अपने देश की" पर आइए और जानिए कैसे इतिहास की किताबों ने हमारी जिंदगी में हंसी का तड़का लगाया।