सावन आया-हिंदी कविता
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
इतिहास से जुड़ी कुछ मजेदार घटनाओं और स्कूल के दिनों की हंसी-मजाक पर आधारित है। कैसे हमारे शिक्षक 'मारसाहब' क्लास में सो जाते थे और हम इतिहास की किताबों से बचने की कोशिश करते थे, आज का वर्तमान, इतिहास के परिपेक्ष्य में कुछ विसंगतियां का चित्रण करने का प्रयास । पूरा लेख पढ़ने के लिए "बात अपने देश की" पर आइए और जानिए कैसे इतिहास की किताबों ने हमारी जिंदगी में हंसी का तड़का लगाया।