डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 24, 2025
Culture
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यह व्यंग्यात्मक चिट्ठी एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति की उन इच्छाओं का दस्तावेज़ है, जो सरकारों, बैंकों और व्यवस्थाओं से निराश होकर सीधे सांता क्लॉज़ तक पहुँचती हैं। मोज़ों से लेकर स्विस अकाउंट, बिजली बिल से लेकर बॉस की मीटिंग तक—यह रचना हास्य, विडंबना और करुणा के बीच झूलती एक सच्ची सामाजिक तस्वीर पेश करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 16, 2025
व्यंग रचनाएं
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अब बच्चा भगवान की देन नहीं, माता-पिता की पसंद बनता जा रहा है।
आँखों का रंग, करियर, आईक्यू—सब कुछ पैकेज में मिलेगा।
पर सवाल यह है कि डिज़ाइन में मासूमियत का कॉलम क्यों छूट गया?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 9, 2025
Book Review
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‘गिरने में क्या हर्ज है’ डाक्टर मुकेश ‘असीमित’ जी का पहला व्यंग्य संग्रह है । पहले संग्रह के हिसाब से देखा जाए तो डॉक्टर साब व्यंग्य में नए हैं पर इनकी रचनाएं काफी परिपक्व हैं । भाषा की बात हो या शिल्प की या विषय की डॉक्टर साब मंझे हुए व्यंग्यकार ही महसूस होंगें । […]