Wasim Alam
Jun 29, 2025
कहानी
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पटना से गाँव लौटते वक्त एक छोटे स्टेशन पर मिला वह नन्हा पानी बेचता लड़का — थकी हुई आँखें, टूटी चप्पलें और एक मासूम हँसी। उसकी बोतल में पानी था, पर आँखों में प्यास। वह हँसी आज भी याद है, जिसने सिखाया कि इंसानियत भी प्यास बुझाती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 30, 2024
व्यंग रचनाएं
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यह लेख गर्मी की तीव्रता और उसके व्यंग्यात्मक पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे व्हाट्सएप पर गलतफहमियाँ फैलाने वाले संदेश गर्मी की वास्तविकता से अलग होते हैं। एक राजनेता भाषण के दौरान खुद पर ठंडा पानी डालते हुए दिखाई देता है, जबकि जनता पसीने में तरबतर है। बिजली कटौती, गर्मी से जूझते लोग, और ट्रांसफार्मर को ठंडा करने के प्रयासों का वर्णन है। लेख में चुनावी गर्मी और वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभावों पर भी व्यंग्य किया गया है, जिसमें गर्मी के कारण होने वाली परेशानियों का जिक्र है।