Vivek Ranjan Shreevastav
Oct 4, 2025
Important days
3
विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘भोपाल’ का लेख “वे स्थान जहां नहीं किया जाता रावण दहन” भारतीय संस्कृति की विविधता और सहिष्णुता का जीवंत प्रमाण है। इसमें उन स्थानों का वर्णन है जहां रावण को खलनायक नहीं, बल्कि विद्वान, शिवभक्त और पूजनीय रूप में याद किया जाता है — जैसे बिसरख, मंडोर, कांकेर, विदिशा, कांगड़ा और गढ़चिरौली। लेख बताता है कि भारत में हर कथा का एक से अधिक पक्ष होता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 2, 2025
Important days
1
दशहरा केवल पुतलों का त्योहार नहीं, यह मनुष्य के भीतर छिपे रावण और राम के बीच की लड़ाई है। रावण के पास सामर्थ्य, ज्ञान और वैभव था, लेकिन संतोष नहीं। राम के पास संघर्ष और वनवास था, लेकिन संतोष ही उनकी शक्ति थी। रावण इच्छाओं का दास था, राम आत्मसंयम के स्वामी। यही कारण है कि आज भी रावण जलाया जाता है और राम पूजित होते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 2, 2025
व्यंग रचनाएं
1
अख़बार ने लिखा — इस बार रावण 'मेड-इन-जापान'! पुतला बड़ा, वाटरप्रूफ, और दोनों पैरों से वोट माँगने तैयार। हम रोते नहीं, तमाशा देखते हैं: रावण की लकड़ी दूर से चमकती है, बच्चे खिलौने समझकर गले लगाते हैं, आयोजक स्टेज पर तालियां खाते हैं। असली रावण तो अंदर छिपा है — वह मुस्कुराता है और हर साल नया रूप धारण कर वोट, पैसा और शो भुनाता है। और सब शांत बैठे।