न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए?

Dr Shailesh Shukla May 6, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।

शुभ लाभ-फटूकड़ियां – 2025

Prahalad Shrimali Oct 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0

दीपावली की यह व्यंग्यात्मक ‘फटूकड़ियां 2025’ केवल रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, राजनीति, न्याय और समाज की मानसिकता पर तीखा हास्य है। लेखक प्रह्लाद श्रीमाली ने पटाखों की जगह बयानों, दीपों, और विचारों को जलाकर एक ऐसी दीपमाला रची है जिसमें नागरिक विवेक, राजनैतिक धुआं और आत्मावलोकन की झिलमिलाहट सब एक साथ चमकते हैं।