डॉ मुकेश 'असीमित'
May 7, 2026
व्यंग रचनाएं
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जब साहित्य प्रयोगशाला बन जाए, पुरस्कार गुरुत्वाकर्षण से गिरने लगें और चापलूसी ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ की जगह ले ले — तब न्यूटन, आर्किमिडीज़ और डार्विन भी व्यंग्य में प्रवेश कर जाते हैं।
डॉ. मुकेश ‘असीमित’ का समकालीन साहित्य पर तीखा, चुटीला और वैज्ञानिक कटाक्ष।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 3, 2025
व्यंग रचनाएं
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“अथ खालीदास साहित्यकथा” आज के साहित्य की खिचड़ी परोसती है। फेसबुकिये कविराज, ट्विटरबाज महंत, सेल्फी–क्वीन और रीलबाज कविगण – सब मंच से उतरकर मोबाइल स्क्रीन पर आ विराजे हैं। आलोचक चुहलबाज बने बैठे हैं और सत्य कोने में जम्हाई ले रहा है। लाइक–पुरुषों की अंगूठी साहित्य की असली मुहर बन चुकी है। यही है साहित्य का आज का फास्ट–फूड संस्करण।