मर्दानी -बड़े साहब के बाद बीबी जी और भी बड़ी निकलीं!

Ram Kumar Joshi Jul 28, 2026 व्यंग रचनाएं 1

रिश्वत कांड में बड़े साहब की मृत्यु के बाद मुआवजे, सरकारी बंगले और अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हुए समझौते पर आधारित तीखा हिंदी व्यंग्य।

डॉ. शैलेश शुक्ला की 5 लघुकथाएँ

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 लघु कथा 1

डॉ. शैलेश शुक्ला की ये पाँच लघुकथाएँ — वारिस, नमक का हक़, कागज़ की ढाल, जाति की छतरी और मुफ़्त का नशा — हमारे समाज की गहरी विडंबनाओं को उजागर करती हैं। लालच, विश्वासघात, व्यवस्था की असमानता, जातिगत राजनीति और मुफ़्तखोरी की मानसिकता पर ये कथाएँ संक्षिप्त होते हुए भी तीखा सामाजिक प्रश्न खड़ा करती हैं।

रिश्तों की गाड़ी और दो करोड़ की एक्सेसरीज़

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 4, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज रिश्ते तय नहीं होते, डेमो दिए जाते हैं। बायोडाटा अब परिचय नहीं, प्रोडक्ट कैटलॉग है—जिसमें माइलेज, एसेट्स और फ्री एक्सेसरीज़ गिनाई जाती हैं। सवाल बस इतना है: क्या संस्कार भी EMI पर मिलते हैं?

एक चिट्ठी भारत माँ के नाम

Neha Jain Aug 14, 2025 Blogs 2

भारत माँ को लिखी बेटी की भावनात्मक चिट्ठी, जिसमें अतीत के गौरवशाली भारत और वर्तमान की विडंबनाओं का तुलनात्मक चित्रण है। वीरता, सांस्कृतिक सौहार्द और नैतिक मूल्यों से लेकर आज के स्वार्थ, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन तक की यात्रा का मार्मिक बयान।

वाह भाई वाह -कविता -हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 7, 2025 हिंदी कविता 0

सामाजिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करती ये कविता ‘वाह भाई वाह’ हमें उन विसंगतियों का एहसास कराती है जहाँ ज़िंदगी त्रासदी बन चुकी है, फिर भी आमजन तमाशबीन बना बैठा है। गड्ढों, महंगाई, रिश्तों की दूरी और शिक्षा की मार के बीच भी मुस्कुराता देश – ‘वाह भाई वाह’!

अमरूद की अमर कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 6, 2025 व्यंग रचनाएं 1

इस व्यंग्य चित्रण में एक हाई-फाई कॉलोनी की किट्टी पार्टी में एक अधिकारी की पत्नी, बाढ़ प्रभावित गांवों की त्रासदी को पर्यटन अनुभव की तरह प्रस्तुत करती है। महिलाएं फोटो देखकर वाह-वाह करती हैं — किसी के डूबते मवेशी, किसी माँ का छत पर रोता चेहरा भी ‘सीन’ बन जाता है। यह रचना सामाजिक संवेदनहीनता और आधुनिक तमाशाई मानसिकता पर करारा कटाक्ष है।