हादसों का इन्तजार है

Ram Kumar Joshi Nov 5, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

देशभर में बढ़ते सड़क हादसे अब सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि हमारी संवेदनहीन व्यवस्था का आईना हैं। जहाँ नियम पालन करने वाले मरते हैं, और व्यवस्था सिर्फ बयान जारी करती है। ट्रैफिक पुलिस की आँखें खुली हैं — मगर देखती नहीं। जब तक जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों में रहेगी, सड़कें श्मशान बनती रहेंगी।