डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 13, 2025
व्यंग रचनाएं
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ह व्यंग्य इंसान और कुत्ते की आवारगी के बीच की महीन रेखा को तोड़ता है। अदालत के आदेश से कुत्तों को शेल्टर में डालने का फरमान आता है, मगर असली आवारगी तो इंसान में है—जो पूँछ हालात के हिसाब से सीधी या टेढ़ी कर लेता है। राजनीति, वोट बैंक और सोशल मीडिया के भौंकने तक, यह रचना समाज के कुत्तापन को आईना दिखाती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 6, 2025
व्यंग रचनाएं
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बाढ़ सिर्फ पानी नहीं लाती, संवेदनहीनता की परतें भी उघाड़ती है। "बाढ़ पर्यटन" एक ऐसी ही कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ किट्टी पार्टी की महिलाएं बाढ़ को तमाशा मान बैठती हैं। अफसरशाही, मीडिया, सोशल मीडिया फॉलोअर्स और सजी-धजी संवेदनहीनता — सब मिलकर बना रहे हैं एक अमानवीय हास्यप्रद दृश्य। हँसी की आड़ में छुपी करुणा की चीख यहाँ साफ सुनाई देती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jun 13, 2024
हिंदी लेख
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आजकल सोशल मीडिया पर रिजल्टों की मार्कशीटों की बरसात हो रही है, हर बच्चे के नब्बे प्रतिशत से कम अंक नहीं दिख रहे । माना कि आजकल शिक्षा नीति में परिवर्तन हुआ है, और अब बच्चों को उदारता से मार्क्स दिए जाते हैं,किसी को फ़ैल नहीं किया जाता है लेकिन हमारे जमाने की तरह तो […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 29, 2024
व्यंग रचनाएं
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शहर में नया फास्ट फूड सेंटर खुला है, जहां मोहितो ('मोयतो') नामक पेय ने धूम मचा दी है। लेखक ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके बेटे ने 'मोज़िटो' के सही उच्चारण 'मोयतो' को सही किया। शहरवासी, जो देसी चाट और पानी पतासे के आदी हैं, इस नए विदेशी पेय का आनंद ले रहे हैं। रेस्टोरेंट में डिज़ाइनर ग्लास में परोसे गए इस पेय को सब लोग पसंद कर रहे हैं और इसके साथ सेल्फी ले रहे हैं। लेखक ने अपने अनुभव को फिल्मी अंदाज में साझा किया और अंत में बताया कि उनकी पत्नी अब इस पेय को घर पर बनाने की तैयारी कर रही हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 13, 2024
Blogs
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इस लेख में, एक निजी चिकित्सक का व्यंग्यात्मक चित्रण किया गया है जो अपने पेशेवर जीवन में उतने सफल नहीं हैं जितना समाज से उम्मीद की जाती है। वह अपने डेस्कटॉप पर बैठकर सोशल मीडिया चलाने, लेखन करने और डिजिटल कला में अपनी रचनात्मकता को प्रदर्शित करने जैसे कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जबकि उनकी पत्नी उन्हें हॉस्पिटल पर अधिक ध्यान देने के लिए ताने मारती हैं। उनकी जीवनशैली और कार्यशैली से उनके स्टाफ को भी अपने शौक पूरे करने का समय मिल जाता है, जिससे हॉस्पिटल में उनकी ड्यूटी एक पार्ट टाइम जॉब की तरह बन जाती है। डॉक्टर साहब अपने कार्यकाल के दौरान खाली समय में लोगों के तंजों का सामना करते हैं और समाज उन्हें एक निष्क्रिय व्यक्ति के रूप में देखता है | यह आलेख समाज में डॉक्टरों के प्रति रूढ़िवादी उम्मीदों और वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाता है।