हुकूमत बदली और हवेलियाँ काँपी: बुलडोज़र राजनीति पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Apr 18, 2026 हिंदी कविता 1

एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।

अलविदा पच्चीस!-kavita-dr mueksh

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 31, 2025 हिंदी कविता 0

वर्ष पच्चीस एक ही नहीं था—वह हर व्यक्ति के लिए अलग निकला। कहीं हँसी थी, कहीं आँसू; कहीं खजाना भरा, कहीं खाली हाथ। यह कविता समय की उसी भीड़ को दर्ज करती है जहाँ हर जीवन अपना-सा सच लेकर चलता है।