डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 6, 2026
Darshan Shastra Philosophy
3
ज़िंदगी घटनाओं की नहीं, व्याख्याओं की शृंखला है।
हर इंसान अपने कंधे पर एक बैग उठाए चढ़ रहा है—यह मानकर कि उसमें सोना है।
पर ऊँचाई बढ़ते ही जब साँस फूलने लगती है, तब सवाल उठता है—
क्या सच में बोझ की क़ीमत थी, या हम सिर्फ़ कहानी ढो रहे थे?
Priyanka Ghumara
Jan 20, 2026
हिंदी लेख
1
“जहाँ दूरी पराजय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की विजय बन जाए—
वहीं से रिश्तों की सच्ची परिभाषा शुरू होती है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 20, 2026
संस्मरण
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“मैं तेज़ नहीं हूँ, न आधुनिक—पर मैंने चलना सिखाया है।
मेरे चक्रों पर समय नहीं, स्मृतियाँ घूमती हैं।”
Pradeep Audichya
Dec 16, 2025
व्यंग रचनाएं
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चौराहे पर बैठा वह कोई साधारण जानवर नहीं था—वह डर, लापरवाही और व्यवस्था की मिली-जुली पैदाइश था। उसकी गुर्राहट में कानून की चुप्पी और उसके सींगों में सत्ता की स्वीकृति चमक रही थी।