Ram Kumar Joshi
Jun 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।
Ram Kumar Joshi
Jan 30, 2026
व्यंग रचनाएं
2
असल में काम तो छोटा बाबू ही करता है, पर वाहवाही और माल ऊपर वालों के हिस्से।
बाबूजी के जूते ही उनकी सबसे मजबूत ढाल थे—कोई पूछे तो जवाब मिल जाता, “कहीं काम से गए होंगे।”
फाइल ढूंढना समुद्र से मोती निकालने जैसा बताया गया, ताकि मोती की क़ीमत भी वसूली जा सके।
धीरे-धीरे कलेक्टर साहब भी समझ गए—इस शाही नौकरी में ज्यादा ईमानदारी से शुगर-बीपी ही मिलता है।
इस तरह बाबूओं के जाल में जिले के सबसे बड़े बाबू सरकार भी सम्मिलित हो गए।