कलियुग के इस उत्तरार्ध में पंचांग देखने की परंपरा केवल शादी-ब्याह और गृहप्रवेश तक सीमित नहीं रह गई है, अब तो सारे तीज-त्योहार चौघड़िया, शुभ लग्न, नक्षत्र आदि देखकर ही मनाए जाते हैं। ऐसे में प्रेमियों ने भी यह निश्चय किया कि यदि करवा चौथ का चाँद देखकर व्रत सिद्ध हो सकता है तो वैलेंटाइन का सूर्य भी विधिवत् गणना से ही उदित होना चाहिए। अतः माघ शुक्ल के उत्तरार्ध से लेकर फाल्गुन की आहट तक जो अंग्रेज़ी कैलेंडर में चौदह फरवरी के आसपास का समय आता है, वही आधुनिक प्रेम पुराण में “वैलेंटाइन व्रत” का पुण्यकाल घोषित किया गया है।
पुराणों में वर्णित है कि एक समय देवताओं ने ब्रह्मा जी से पूछा—
“हे पितामह! कलियुग में प्रेम की स्थिरता कैसे बनी रहे? कलियुग में ‘आई लव यू’ कब ‘नीड टू टॉक यू’ में कन्वर्ट हो जाए, पता ही नहीं चलता!”
तब ब्रह्मा जी ने स्मित मुस्कान के साथ कहा—
“माघ पूर्णिमा के उपरांत जो सप्त दिवस आते हैं, वे प्रेम सप्तक कहलाएँगे— सात दिवसीय उपव्रतों का समुच्चय इस दिवस का प्रारंभ रोज से होकर प्रपोज, चॉकलेट, टेडी, हग, किस होते हुए अंततः महाव्रत के रूप में परिणत होगा ।”
यहाँ प्रत्येक दिन की अपनी विशिष्ट आध्यात्मिक और जीवन को धन-धान्य, प्रेम-संपदा से परिपूर्ण करने वाली महत्ता समाहित है। जैसे सुहागिनें करवाचौथ का चंद्रमा ताकती हैं, वैसे ही आधुनिक युग के युगल फरवरी के कैलेंडर को ताकते हैं। जब माघ शुक्ल पक्ष का अंत आते-आते बाज़ारों में लाल रंग की बाढ़ आ जाए, जब गली-गली में टेडी बियर ऐसे टँगे दिखें जैसे सावन में कचनार, तब समझ लीजिए—वैलेंटाइन व्रत का पावन काल प्रारंभ हो चुका है।
पंचांगकारों ने गहन शोध के बाद उद्घोष किया है कि यदि इस दिन त्रयोदशी तिथि हो तो प्रेम स्थिर रहता है, चतुर्दशी हो तो भावनाएँ तीव्र और नाटकीय होती हैं, और यदि पूर्णिमा समीप हो तो वचन देने से पहले दो बार सोचना चाहिए, क्योंकि चंद्रमा की परिपूर्णता मन को भी परिपूर्ण कल्पनाओं से भर देती है। भद्रा का विशेष विचार अनिवार्य है; भद्रा काल में “आई लव यू” का उच्चारण करने से उत्तर में केवल “हम्म” प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि भद्रा प्रातः हो तो संदेश सामान्य रखें, यदि सायंकाल हो तो सार्वजनिक उद्घोष टालें, क्योंकि प्रेम से अधिक खतरनाक भद्रा नहीं, अपितु भ्रू-भंगिमा होती है। भद्रा कब से कब तक रहेगी—यह इस पर निर्भर करता है कि आपकी वैलेंटाइनी का मूड किस ग्रह में गोचर कर रहा है।
यदि शुक्र उच्च राशि में हो तो पूरा सप्ताह शुभ रहेगा। यदि मंगल वक्री हो तो “किस डे” पर विशेष सावधानी बरती जाए। यदि शनि की ढैया हो तो “प्रॉमिस डे” पर लिखित में वादा न करें—केवल मौखिक ही रखें।
चौघड़िया की गणना भी अनिवार्य है। अमृत चौघड़िया में “आई लव यू” का उच्चारण वर्ष भर मधुर रहता है, लाभ में प्रपोज करना श्रेयस्कर है, शुभ में चॉकलेट अर्पण करें, रोग और काल में पुरानी शिकायतें न छेड़ें, अन्यथा प्रेम कुंडली में अनावश्यक ग्रहण लग सकता है। संध्या के उस अल्प मुहूर्त का विशेष महत्व है जब सूर्य अस्त और मोबाइल का नेटवर्क स्थिर हो; उसी क्षण का उच्चारित वचन सर्वाधिक फलदायी माना गया है। यदि चंद्रदर्शन के उपरांत प्रेमोच्चार किया जाए तो उसे दैवीय स्वीकृति प्राप्त होती है—बशर्ते कि सामने से “ओके” के स्थान पर स्मित मुस्कान प्राप्त हो।
वस्त्र-विन्यास भी साधारण नहीं होने चाहिए। लाल, गुलाबी या मैरून रंग को शुक्र का आशीर्वाद प्राप्त है; सोमवार पड़े तो सफेद के साथ लाल का संयोजन, शुक्रवार हो तो पूर्ण गुलाबी, और यदि मंगलवार हो तो अति-उग्र लाल से बचें, अन्यथा मंगल अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है। रोज क्वार्ट्ज धारण करने से प्रेम की तरंगें कोमल होती हैं, गार्नेट स्थिरता देता है, और हीरा तभी शुभ है जब उसकी ईएमआई ग्रहदशा से मेल खाती हो। नर पक्ष को चाहिए कि कम से कम रुमाल ही सही, लाल अवश्य रखे; नारी पक्ष परिधान में कोमल आभा रखे, जिससे नक्षत्रों का संतुलन बना रहे। यदि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का संयोग हो तो इसे कामदेव का विशेष आशीर्वाद माना जाता है; किंतु कृत्तिका या मूल में पुराने प्रसंगों का उल्लेख वर्जित है। कुछ विशेष रत्न पहनना भी बताया गया है—कुँवारे जनों हेतु रोज क्वार्ट्ज, और विवाहितों हेतु मोबाइल का स्क्रीन गार्ड, ताकि चैट सुरक्षित रहे—उत्तम फलदायी माना गया है।
पूजन-विधि भी विशिष्ट है। प्रातः स्नान के पश्चात मोबाइल को पूर्ण चार्ज करना आधुनिक कलश-स्थापन है। लाल गुलाब का अर्पण करें; यदि मूल्य अधिक हो तो डिजिटल पुष्प भी मान्य है। सुगंधित द्रव्य से वातावरण पवित्र कर प्रेमी उत्तर दिशा की ओर मुख करके तीन बार प्रेमोच्चार करें—“ॐ लवाय नमः, ॐ डेटाय स्वाहा।” चॉकलेट का नैवेद्य यथाशक्ति उत्तम फलदायी है; उधार का प्रसाद निषिद्ध है। हग संस्कार आठ सेकंड से अधिक न हो—सामाजिक मंगल दोष से बचाव हेतु—और किस संस्कार वहीं संपन्न करें जहाँ भीड़ न्यूनतम तथा कैमरे सीमित हों। प्रॉमिस दिवस पर दिया गया वचन वही हो जिसे अगले वैलेंटाइन तक स्मृति में रखा जा सके। “यथाशक्ति पालनं करिष्यामि” का संकल्प पर्याप्त है, शेष ग्रह स्वयं संभाल लेंगे।
कुछ और मंत्र भी यथासंभव उच्चारित करें—प्रपोज मंत्र: “ॐ हृदयेश्वरि स्वीकारय माम्।” प्रॉमिस मंत्र: “यथाशक्ति पालनं करिष्यामि।” कभी-कभी समाधान मंत्र—“क्षमस्व प्रिये, पुनः न करिष्यामि”—का यथोचित उच्चारण ग्रहदशा और नक्षत्रों में दोष का निवारण कर सकता है।
अंततः यह स्मरण रहे कि पंचांग, नक्षत्र, भद्रा, चौघड़िया सबका ध्यान रखते हुए किया गया वैलेंटाइन अनुष्ठान निश्चित ही फलदायी होगा। यदि समय पर उत्तर दिया गया, यदि शिकायतें रोग चौघड़िया में स्थगित रहीं, यदि वचन लाभ में और आलिंगन अमृत में संपन्न हुआ, तो प्रेम वर्ष भर ऑनलाइन रहेगा।
— डॉ. मुकेश ‘असीमित’
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