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“Roses and Thorns” : मेरी एक नई तीखी-मीठी उड़ान!

📘 Roses and Thorns by Dr. Mukesh Aseemit

अब तक मेरी दो पुस्तकें—नरेंद्र मोदी का निर्माण” और गिरने में क्या हर्ज़ है”—लोकापर्ण का स्वाद चख चुकी हैं। दोनों को पाठकों से जबरदस्त प्यार मिला। अब आप सोच रहे होंगे कि भाई साहब, साल भी पूरा नहीं हुआ और तीसरी किताब भी आ गई?’
तो जनाब, ऐसा भी नहीं है। लिखना-छपना, पत्रिकाओं में प्रकाशित होना एक अलग किस्म की दैनिक साधना है, और किताब छपवाना एक अलग जंग। इसमें आपकी मेहनत तो लगती ही है, साथ ही किसी third Person को भी  थोड़ी दया दृष्टि रखनी पड़ती है।

मैंने जो पहली पांडुलिपि बनायी थी, वह कोरोना काल में तैयार हो गई थी। दो साल तक वो मेरी आलमारी में ‘मौन व्रत’ में थी, फिर एक साल प्रकाशक के यहां ‘तपस्या’ में रही। दोष किसी का नहीं—मैं ही कुछ ज्यादा ‘धैर्यवान’ था।
फिर सोचा अगला व्यंग्य संग्रह अगले साल… पर तभी ध्यान आया कि फरवरी में वर्ल्ड बुक फेयर है। अगर उससे पहले कुछ हो गया तो सोने पे सुहागा!
बस फिर क्या था—जो लगभग 200 रचनाएं पहले से लिखी हुई थीं, उनमें से ताबड़तोड़ 51 भेज दीं। चयन भी कुछ यूं रैंडम था जैसे बच्चे जन्मदिन पर चॉकलेट्स उठा लेते हैं।

सच पूछिए तो—रचनाएं अपने आप से प्यार करने जैसी होती हैं बिलकुल अपने बेटे-बेटियों की तरह । अब कोई आपसे कहे की ,इनमे से अच्छे बेटे बेटियों को सेल्क्ट करो..थोड़ा मुश्किल होता है । लेकिन हमने भी एक जिम्मेदार परेंटिंग निभाते हुए ,जहा जो खटका उसे सुधारने का प्रयास किया ।

15 रचनाएँ तो पहले से ‘हिंदी समय’ जैसी प्रतिष्ठित साइट पर प्रकाशित हो चुकी थीं, तो उन्हें थोड़ी बहुत सजावट-संवार के बाद शामिल किया। बाकी के लिए ग्रामर, वाक्य विन्यास, विराम चिह्नों पर भी थोड़ी ‘सर्जरी’ करनी पड़ी।

भावना प्रकाशन का धन्यवाद देना बनता है, जिन्होंने मेरी पांडुलिपि को स्वीकार किया। भावना एक सम्मानित मंच है। वहां से पहली किताब छपना अपने आप में एक अलग ही अनुभव था।
नरेंद्र मोदी का निर्माण” का भव्य लोकार्पण हुआ—राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. इन्द्रशेखर तत्पुरुष  जी के कर-कमलों से।
गिरने में क्या हर्ज़ है” का विमोचन देश के दिग्गज व्यंग्यकारों की मौजूदगी में पुस्तक मेले में हुआ—एक शानदार आयोजन रहा!आप के मन में देश के ख्याति प्राप्त व्यग्यकारों की जो लिस्ट है ,प्रभु कृपा से उन सभी का आशीर्वाद मुझे इस पुस्तक के लिए मिला है !

अब बात “Roses and Thorns” की—अंग्रेज़ी व्यंग्य संग्रह की।
इसकी प्रेरणा मेरी बेटी अनुष्का से मिली। रोज उसे अपनी रचनाएँ पढ़ने को कहता था, और वह मासूमियत से बोलती—पापा, हिंदी समझ नहीं आती… इंग्लिश में लिखो न!”
बस वही प्रेरणा काम आई। मैंने अपनी रचनाओं का अंग्रेज़ी में अनुवाद करना शुरू किया, लेकिन सीधा ‘गूगल ट्रांसलेट’ नहीं किया, वरना व्यंग्य की आत्मा दम तोड़ देती।
कुछ काम खुद किया, कुछ अच्छे ट्रांसलेटर की मदद ली। कोशिश की कि व्यंग्य का मूल स्वाद बना रहे, स्थानीय शब्दों की खुशबू बरकरार रहे। जहाँ ज़रूरी हो, हिंदी शब्द जस के तस रहने दिए।

मातृभारती जैसे मंचों पर अंग्रेज़ी में प्रकाशित करना शुरू किया, और वहां से भी बढ़िया रिस्पॉन्स आने लगा।
वैसे भी, ब्लॉगिंग का 10 साल का अनुभव है, तो डिजिटल पब्लिशिंग अब कुछ-कुछ चाय बनाना जैसा लगता है।

25 रचनाओं की फाइनल पांडुलिपि तैयार की, कई पब्लिशर्स को भेजा।
कुछ ने जवाब ही नहीं दिया, कुछ ने कहा—“100 किताबें खरीदिए, तभी बात करेंगे”, और कुछ ने ‘हाइब्रिड मॉडल’ का गोरखधंधा पेश किया।
मैंने सोचा—या तो ट्रेडिशनल पब्लिशिंग, या फिर सेल्फ पब्लिशिंग। कोई बीच का रास्ता नहीं!

इसी खोज में Notion Press अच्छा प्लेटफॉर्म लगा।
खुद ही कवर डिजाइन किया, खुद ही इंटीरियर।
डिजिटल डिजाइनिंग और पोस्ट-मॉर्केटिंग में खुद का अनुभव काम आया।
सिर्फ ₹3000 खर्च कर के किताब तैयार कर ली—जिसमें लेखक प्रतियाँ भी मिलीं, Flipkart, Amazon और Notion Press Webstore पर लिस्टिंग भी!
और तो और, इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भी लिस्टिंग हो गई!

अंग्रेजी में व्यंग्य संग्रह मिलना वैसे भी रेगिस्तान में गुलाब ढूंढने जैसा है।
जॉन ऑरवेल के “Animal Farm” “१९८४” और डॉ ज्ञान चतुर्वेदी सर का “Mad House” जैसे अपवाद हैं, वरना ‘सैटायर’ में अंग्रेजी जगत भी काफी कंजूस है।
इसीलिए सोचा कि इस खालीपन को थोड़ा भरने का छोटा प्रयास करूँ।

सेल्फ पब्लिशिंग मेहनत का काम है, पर सुकून भी बहुत है—हर चीज़ आपके कंट्रोल में होती है।
एक-एक बिकी किताब का रोज का ब्यौरा, रॉयल्टी रिपोर्ट, पारदर्शिता और लेखक को आत्मविश्वास।
कम से कम हमारे जैसे लेखकों के लिए जो पुरस्कार, सम्मानों की दौड़ में नहीं, बल्कि पाठकों तक पहुँचने के लिए लिखते हैं।

बड़े ट्रेडिशनल हाउसों में लंबी वेटिंग होती है। सेलिब्रिटी लेखकों को वरीयता मिलती है। ऐसे में भावना प्रकाशन जैसा मंच मिलना सचमुच सौभाग्य है।
वहाँ से एक अच्छी शुरुआत मिली, एक अच्छा पाठक वर्ग मिला, और आत्मविश्वास भी बढ़ा।

मैं धन्यवाद देना चाहूंगा उन सभी वरिष्ठ रचनाकारों का जिन्होंने समय-समय पर मार्गदर्शन दिया।
नाम लेकर किसी को छोटा नहीं करना चाहता, लेकिन किसी का भी एक नाइस वर्ड” भी मेरे लिए प्रेरणा रहा है।

अब मेरी यह नई किताब “Roses and Thorns” आप सब पाठकों को समर्पित है।
आपकी प्रतिक्रियाओं का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

बुक डिटेल्स के लिए मुझसे व्हाट्सएप करें: 8619811757
Amazon, Flipkart और Notion Press वेबसाइट पर किताब उपलब्ध है।

अगर कोई bulk purchase के लिए संपर्क करना चाहे (गिफ्टिंग या सेलिंग पॉइंट के लिए), तो स्पेशल रेट्स पर मदद की जाएगी।

अब कम से कम अगले वर्ल्ड बुक फेयर तक प्रकाशन कार्य से छुट्टी!
लेकिन लिखना ,छपना जारी रहेगा—
मैं लिखता रहूँगा,
आप पढ़ते रहिएगा!

— डॉ. मुकेश ‘असीमित’

(लेखक, व्यंग्यकार, चिकित्सक)

निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान 
पता -डॉ मुकेश गर्ग 
गर्ग हॉस्पिटल ,स्टेशन रोड गंगापुर सिटी राजस्थान पिन कॉड ३२२२०१ 

पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ 

लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, लेख, व्यंग्य और हास्य रचनाएं

प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से )
काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से 
काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से 
अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से 

गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से 

प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से 
देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित 

सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ” 

📚 मेरी व्यंग्यात्मक पुस्तकें खरीदने के लिए लिंक पर क्लिक करें – “Girne Mein Kya Harz Hai” और “Roses and Thorns
Notion Press –Roses and Thorns

📧 संपर्क: [email protected]

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