आजाद गजल -क्या मिला!

हो लाल पीला तिलमिलाकर क्या मिला

क्रोध करके कुलमिलाकर क्या मिला!

रस पाने हेतु आम को नरम करना लाजमी

अपना भेजा पिलपिला कर क्या मिला!

हंसते-हंसते खूब उनका पेट दुखने लगा

संवेदना में बिलबिलाकर क्या मिला!

सुख बढ़ता है अपनी खुशियां बांटने से

बाथरूम में खिलखिला कर क्या मिला!

प्यास बुझाना बेशक बड़ा परोपकार है

भूखे को पानी पिलाकर क्या मिला!

पेड़ की डाली हिलाते,फल फूल झड़ते

हिलता हुआ पर्दा हिलाकर क्या मिला!

मसाले से दाल सब्जी का स्वाद बढ़ता

तथ्यों में नमक-मिर्च मिलाकर क्या मिला!

मुस्कुराकर बोलते तो दीवारें भी गुनगुनातीं

घर में अपना डर बिठाकर क्या मिला!

खतरनाक है उसके हाथ में उस्तरा होना

बंदर को हजामत सिखाकर क्या मिला!

अंधेरे में मासूम जुगनू जश्न मनाते शान से

रोशनी का सिलसिला कर क्या मिला!

मन को महकाता,याराना इमानदारों से

कायरों से हिलमिलाकर क्या मिला!

राष्ट्र गौरव,स्वाभिमान की चेतना नहीं

ऐसे मुर्दों को जिलाकर क्या मिला!

अपनों को अपनाना,निभाना नहीं आया

परायों से शिकवा-गिलाकर क्या मिला!

माना दूध पिलाने की परंपरा है पुरानी

सांप को जहर पिलाकर क्या मिला!

देश की महिमा गरिमा से खेलता रहता

ऐसे नेता को जीत दिलाकर क्या मिला –

प्रहलाद श्रीमाली

Prahalad Shrimali

Prahalad Shrimali

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन…

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन विषयक: साहित्यिक पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य एवं कविताएं प्रकाशित। राजस्थानी व्यंग्य संग्रह ‘‘आवळ कावळ’’ 1992 में प्रकाशित एवं ‘‘मारवाडी सम्मेलन, मुम्बई’’ द्वारा पुरस्कृत। . कहानी ‘उत्तरहीन’ पर जनदर्शन संस्थान, भिलाई द्वारा शिक्षणार्थ लघु वीडियो फिल्म निर्मित। कहानी ‘‘कमलजी कहानी में कला नहीं घुसाते’’ 2002 को किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’ प्राप्त। उपन्यास ‘‘पापा मुस्कुराइए ना!’’ को 2010 का ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’। कहानी संग्रह ‘‘अज्ञातवास में सिद्ध’’ ‘जनसुलभ’ पेपरबैक्स द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर आमंत्रित पाण्डुलिपियों में से चयनित व प्रकाशित (2011) नवभारत टाइम्स में मनोहर श्याम जोशी के व्यंग्य टिप्पणी स्तंभ ‘मेरा भारत महान’ में कई बार पुरस्कृत। व्यंग्य संग्रह ‘‘मोती जैसी घुन‘‘ ‘सदीनामा प्रकाशन‘ कोलकाता द्वारा प्रकाशित (2012) कहानी संग्रह ‘‘मुन्ना रो रहा है! ‘‘ ‘अमरसत्य प्रकाशन‘ (किताबघर प्रकाशन का उपक्रम) (2014) राजस्थानी कहानी ' महाभारत रा अजुआळा में ' को वर्ष 2015 का ' डॉ. नृसिंह राजपुरोहित स्मृति पुरस्कार '। लघुकथा ' जिंदगी की रफ्तार ' वर्ष 2019 में ' कथादेश अखिल भारतीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता -11' में पुरस्कृत।

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