तंदूरी रोटी युद्ध: वीर तुम डटे रहो

शादी ब्याह का सीजन है ..तंदूरी रोटी के संदर्भ में हास्य-व्यंग्य कविता प्रस्तुत है

वीर तुम डटे रहो ..वीर तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो। वीर तुम डटे रहो,

छप्पन भोग सजाए हैं,

मिठाइयाँ भरमाये हैं,

पापड़ की खनक लुभाएगी,

चटनी की खुशबू भटकाएगी,

हो न जाना विकल ,

होगा तू वीर सफल

आज नहीं तो कल

वीर, तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो।

भीड़ तुम्हें धकाएगी,

लाइन से हटाएगी,

कोई तुम्हे गरियायेगा ,

कोई तुम्हे लातियायेगा ।

पर याद रखो, यह युद्ध है,

अपने ही तेरे विरुद्ध है।

वीर, तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो।

सब्जी आंख्ने मीन्चेंगी ,

सुगंध तुम्हें खींचेगी।

प्लेट तुम्हारी खाली होगी,

भरी दुसरे की थाली होगी।

बस दुनिया की उल्टी रीत है,

पक्की तुम्हारी जीत है।

वीर, तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो।

दुल्हे का जीजा आएगा,

तुम्हें लाइन से हटाएगा।

दो रोटियां ले जाएगा ,

तुम्हे ठेंगा दिखा जायेगा ।

दिल पर नहीं लेना है ,

सबको हिसाब ऊपर देना है ।

वीर, तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो।

जो वीर रोटी पायेगा ,

वह इतिहास बना जाएगा ।

जन-जन में नाम होगा,

महफिल में सलाम होगा।

तंदूरी रोटी की इस जंग में,

जो विजयी, वही रंग में।

तो वीर, तुम डटे रहो,

तंदूर से सटे रहो।

— डॉ. मुकेश ‘असीमित’

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डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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