फट जाएंगे-Anti-Smoking Rap Song: युवाओं को तंबाकू और सिगरेट से बचाने की सामाजिक मुहिम

“फट जाएंगे” — युवाओं को धूम्रपान से बचाने वाला एक व्यंग्यात्मक एंटी-स्मोकिंग रैप गीत

गीतकार एवं परिकल्पना: डॉ. मुकेश असीमित
संगीत शैली: बॉलीवुड रैप, गिटार एवं यूथ एंथम
संगीत निर्माण: एआई-सहायता प्राप्त म्यूजिक प्लेटफॉर्म
अभियान: Anti-Smoking Campaign | No Tobacco Campaign | Youth Awareness

गीत सुनें और जनहित में साझा करें

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कभी-कभी कोई गंभीर बात युवाओं तक गंभीर भाषणों से नहीं, बल्कि हास्य, संगीत और उनकी अपनी भाषा में कही गई चेतावनी से अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचती है।

इसी विचार से तैयार किया गया है व्यंग्यात्मक रैप गीत—“फट जाएंगे”

यह गीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को सिगरेट और निकोटीन की लत से सावधान करने के उद्देश्य से रचा गया एक सामाजिक जागरूकता अभियान है। गीत में हास्य है, चुटीले संवाद हैं, बॉलीवुड शैली का संगीत है और बार-बार दोहराया जाने वाला एक ऐसा हुक है जो श्रोता को हँसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करता है—

“सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
फेफड़े फट जाएंगे!
सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
सपने कट जाएंगे!”

यहाँ “फेफड़े फट जाएंगे” किसी चिकित्सकीय निदान के रूप में नहीं, बल्कि एक तीखी व्यंग्यात्मक चेतावनी के रूप में प्रयोग किया गया है। वास्तविक संदेश यह है कि धूम्रपान केवल फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुँचाता, बल्कि व्यक्ति की साँसों, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, परिवार और भविष्य के सपनों को भी प्रभावित करता है।

भारत में तंबाकू की समस्या कितनी गंभीर है?

भारत में तंबाकू का सेवन आज भी सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में तंबाकू के कारण प्रतिवर्ष लगभग 13.5 लाख लोगों की मृत्यु होती है। देश में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का प्रयोग करते हैं।

तंबाकू केवल सिगरेट तक सीमित नहीं है। बीड़ी, हुक्का, चिलम, खैनी, गुटखा, जर्दा और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पाद भी कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारियों तथा समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ाते हैं। तंबाकू का कोई भी रूप सुरक्षित नहीं माना जाता और सेकंड-हैंड स्मोक अर्थात किसी दूसरे व्यक्ति की सिगरेट का धुआँ भी नुकसानदेह है।

सबसे बड़ी चिंता—तंबाकू के निशाने पर युवा

युवा अवस्था प्रयोग, मित्रों के दबाव और स्वयं को आधुनिक या साहसी दिखाने की इच्छा से प्रभावित होने वाली उम्र होती है। अक्सर शुरुआत “सिर्फ एक कश”, “दोस्तों के साथ कभी-कभी” या “मैं जब चाहूँगा छोड़ दूँगा” जैसी सोच से होती है।

भारत के Global Youth Tobacco Survey 2019 के अनुसार 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 8.5 प्रतिशत स्कूली विद्यार्थी किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का प्रयोग कर रहे थे। इनमें लड़कों का प्रतिशत 9.6 और लड़कियों का 7.4 था।

यह आँकड़ा केवल संख्या नहीं है। इसके पीछे ऐसे बच्चे और किशोर हैं जिनकी पढ़ाई, खेल क्षमता, आत्मविश्वास, आर्थिक स्थिति और दीर्घकालीन स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। WHO ने भी चेताया है कि तंबाकू उद्योग युवाओं को आकर्षित करने के लिए उत्पादों की छवि, स्वाद, प्रचार और सामाजिक प्रभाव का उपयोग करता है।

“एक कश से क्या होगा?”—यहीं से शुरू होता है खतरा

गीत का स्पोकन रैप इसी सामान्य भ्रम पर चोट करता है—

“क्या बोला?
एक कश से क्या होगा?
यही सोचकर लाखों लोगों ने
खुद को धोखा दिया है!”

निकोटीन एक लत पैदा करने वाला पदार्थ है। शुरुआत में व्यक्ति को कुछ समय के लिए उत्तेजना, राहत या एकाग्रता का भ्रम हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर निकोटीन का अभ्यस्त होने लगता है। इसके बाद बिना सिगरेट के बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में कठिनाई और बार-बार धूम्रपान करने की इच्छा हो सकती है।

यही कारण है कि गीत में सिगरेट को “मज़ा” नहीं, बल्कि धीरे-धीरे कसता हुआ निकोटीन का चक्कर कहा गया है—

“पहले देता बड़ा मज़ा,
फिर जेब खाली, साँस उधारी,
और बीमारी की सजा।”

डराना नहीं—समय रहते जगाना है

“फट जाएंगे” का उद्देश्य धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का उपहास करना या उसे अपराधी ठहराना नहीं है। तंबाकू की लत एक वास्तविक निर्भरता है और इससे जूझ रहे व्यक्ति को ताने से अधिक सहयोग, परामर्श और सकारात्मक प्रेरणा की आवश्यकता होती है।

गीत का पात्र “सोनू” किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है। वह हमारे आसपास मौजूद हर उस दोस्त, भाई, सहकर्मी या विद्यार्थी का प्रतीक है जो सिगरेट को सामान्य आदत मानकर अपने स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है।

गीत उससे कहता है—

“रुक जा यार, संभल जा यार,
अभी भी है मौका तैयार।”

धूम्रपान छोड़ना कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। भारत सरकार की National Tobacco Quitline—1800-11-2356 पर निःशुल्क परामर्श प्राप्त किया जा सकता है। तंबाकू छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति 011-22901701 पर मिस्ड कॉल देकर मोबाइल आधारित सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं।

सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं से अपील

इस गीत को एंटी-स्मोकिंग और नो-टोबैको जागरूकता अभियानों के लिए तैयार किया गया है। निम्न संस्थाएँ इसे अपनी सामाजिक गतिविधियों में उपयोग कर सकती हैं—

  • स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय
  • मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज
  • सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाएँ
  • युवा संगठन, NSS और NCC इकाइयाँ
  • स्वास्थ्य विभाग एवं तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ
  • अस्पताल और चिकित्सक संगठन
  • लायंस, रोटरी एवं अन्य सेवा संस्थाएँ
  • नशामुक्ति और कैंसर जागरूकता अभियान
  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस कार्यक्रम
  • नुक्कड़ नाटक, युवा महोत्सव और स्वास्थ्य प्रदर्शनियाँ

शैक्षणिक तथा गैर-व्यावसायिक जनजागरूकता कार्यक्रमों के लिए इस गीत का मूल ऑडियो या अभियान उपयोग हेतु संस्करण अनुरोध पर उपलब्ध कराया जा सकता है। उपयोग से पूर्व अनुमति लेना तथा गीतकार और रचनाकार को उचित श्रेय देना आवश्यक होगा।

गीत उपयोग अथवा सहयोग हेतु संपर्क:
डॉ. मुकेश असीमित
[यहाँ संपर्क ईमेल अथवा मोबाइल नंबर जोड़ें]

आइए, इस गीत को केवल सुनें नहीं—एक अभियान बनाएँ

आप इस गीत को किसी ऐसे मित्र या युवा के साथ अवश्य साझा करें जो धूम्रपान करता है या “सिर्फ कभी-कभी” सिगरेट पीने को सुरक्षित समझता है।

उसे डाँटने के बजाय गीत के माध्यम से प्रेम से कहें—

“सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
जिंदगी बच जाएगी!
सिगरेट को जो छोड़ दिया,
तो दुनिया मुस्कुराएगी!”

विद्यालय, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएँ और युवा संगठन इस गीत पर रील, शॉर्ट वीडियो, पोस्टर, नुक्कड़ प्रस्तुति अथवा सामूहिक नो-स्मोकिंग प्रतिज्ञा तैयार कर सकते हैं।

हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति को शर्मिंदा करना नहीं, बल्कि एक आदत को चुनौती देना है।

क्योंकि सिगरेट छोड़ना केवल एक बुरी आदत छोड़ना नहीं है—यह अपनी साँसें, सपने और भविष्य वापस पाना है।


गीत के संपूर्ण बोल

फट जाएंगे

Hook

फट जाएंगे… फट जाएंगे…

ओ भाई तेरे फेफड़े फट जाएंगे!

खोपड़ी के अंदर वाले
सारे सिग्नल कट जाएंगे!

फट जाएंगे… फट जाएंगे…

ओ भाई तेरे फेफड़े फट जाएंगे!

सिगरेट को अगर ना छोड़ा
तो डॉक्टर घर तक आएंगे!

Verse 1

अरे धुएँ के संग-संग धीरे-धीरे
ऊपर को तू जा रहा है,

अपनी ही बारात का बैंड
खुद ही तू बजा रहा है।

कल तक था बादाम जैसा,
अब छुहारे जैसा हाल,

“मोटा सोनू” कहने वाले
अब ना पूछें तेरा हाल।

चेहरा सूखा, आँखें फीकी,
खाँसी का है नया अवतार,

फिर भी भाई तू है अपना,
इसलिए देते हैं पुकार।

Pre-Hook

रुक जा यार, संभल जा यार,
अभी भी है मौका तैयार,

वरना एम्बुलेंस बोलेगी—
“बैठो भाई, अबकी बार!”

Hook

फट जाएंगे… फट जाएंगे…

ओ भाई तेरे फेफड़े फट जाएंगे!

खोपड़ी के अंदर वाले
सारे सिग्नल कट जाएंगे!

सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
फेफड़े फट जाएंगे!

सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
सपने कट जाएंगे!

Verse 2

निकोटीन का ये चक्कर भाई,
पहले देता बड़ा मज़ा,

फिर जेब खाली, साँस उधारी,
और बीमारी की सजा।

सीढ़ी चढ़ते फूल रही है
साँसों की सरकार,

फेफड़े दोनों धरना देकर
कर रहे तुझसे गुहार।

“भाई, हमें चिमनी मत बना,
थोड़ी तो हम पर दया कर,

धुआँ-धुआँ ये जिंदगी छोड़,
खुद पर थोड़ा रहम कर!”

Bridge—Spoken Rap

क्या बोला?

“एक कश से क्या होगा?”

यही सोचकर लाखों लोगों ने
खुद को धोखा दिया है!

एक कश से शुरू हुई कहानी
अस्पताल तक पहुँची है!

Final Hook

फट जाएंगे… फट जाएंगे…

ओ भाई तेरे फेफड़े फट जाएंगे!

खोपड़ी के अंदर वाले
सारे सिग्नल कट जाएंगे!

सोनू सिगरेट ना पी मेरे यार,
जिंदगी बच जाएगी!

सिगरेट को जो छोड़ दिया,
तो दुनिया मुस्कुराएगी!

हे…

ना धुआँ, ना बीमारी,
यही है असली समझदारी!

तंबाकू को बोलो “ना”,
स्वस्थ जीवन को “हाँ” हमारी!


गीत परिचय

गीत: फट जाएंगे
अभियान: एंटी-स्मोकिंग एवं नो-टोबैको यूथ अवेयरनेस
विधा: बॉलीवुड गिटार रैप
परिकल्पना एवं मूल गीत लेखन: डॉ. मुकेश असीमित
संगीत: एआई-सहायता प्राप्त म्यूजिक प्लेटफॉर्म
प्रस्तुति: Music with Mukesh | Dr. Mukesh Aseemit Creations

हमारी सामूहिक प्रतिज्ञा

न स्वयं तंबाकू का प्रयोग करेंगे,
न मित्रों को इसके लिए प्रेरित करेंगे।
धूम्रपान छोड़ने वाले व्यक्ति का उपहास नहीं,
बल्कि सहयोग और उत्साहवर्धन करेंगे।

जनहित संदेश

ना धुआँ, ना बीमारी—यही है असली समझदारी।
तंबाकू को बोलें “ना”, स्वस्थ जीवन को बोलें “हाँ”।

राष्ट्रीय तंबाकू क्विटलाइन: 1800-11-2356

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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