उठो पार्थ, अपना मोबाइल उठाओ: सोशल मीडिया युग का नया धर्मयुद्ध

– सुबह का मोबाइल अलार्म तीन बार बज चुका था।जो हर बार अपने पांच मिनट के अंतर से बज रहा था।
तभी एक आवाज गूंजी
हे पार्थ,किंचित भी भय न करो।
दो जीबी डाटा तुम्हारा इंतजार कर रहा है।
उठो पार्थ अपना मोबाइल उठाओ। इसको सूरज के अस्त होने से पहले खत्म कर दो ।
बिस्तर पर लेटे लेटे पार्थ ने याद किया कि रात दो बजे तक मोबाइल चलाया था।उसी समय ये अलार्म बंद
करना भूल गया।शायद कोई रील चल रही है उसी आवाज़ें सुनाई दे है ।
इधर से पार्थ ने उनींदे होकर क्या,पर मेरा मस्तिष्क तो शून्यता की प्राप्ति में है।मुझे कुछ नहीं सूझ रहा।
क्यों पार्थ ,,?
आज मैने जो व्हाट्स ऐप पर स्टेट्स लगाया था ,वही दुर्योधन ने भी लगाया है।लोग सोचेंगे हम एक दूसरे
की पोस्ट की कॉपी करते है ,हमारा कंटेंट क्रिएटर का जो बैज है वह छिन जाएगा।
सामने से फिर धीर गंभीर आवाज गूंजी।
पार्थ समय व्यतीत न करो,,तुम्हारे मोबाइल की बैटरी भी फुल है।उसे उठाओ और धराशाई कर दो दुश्मनों
को।
लेकिन केशव,,सामने मेरे अपने है।
केशव हंस पड़े,,।
हे पार्थ ये भ्रम है तुम्हारा।इस संसार में कोई अपना नहीं है। न किसी का मोबाइल अपना है,न उसका
पासवर्ड अपना है।
यदि तुम इन्हें अपना कहते हो तो ये भ्रम है तुम्हारा ।
हे पार्थ सुनो यदि ये अपने होते तो
तुम्हारी पोस्ट को लाइक नहीं करते क्या ?
उस पर अपना कमेंट लिखने से क्यों बचते हैं ?
जो व्यक्ति आपकी पोस्ट को देख कर इग्नोर करके आगे बढ़ जाए वह अपना नहीं हो सकता,इन्हें अपना
मत कहो पार्थ ।
लेकिन केशव ,,फिर मै भी कभी कभी इनके पोस्ट पर लाइक कर देता हूं।

स्मरण करो पार्थ ,जब तुमने नए 50 मेगा प्रिक्सल का कैमरा वाला फोन लिया था। उसमें उस भव्य महल
के साथ सुंदर सी सेल्फी लगाई थी उस समय को स्मरण करो,,।
हां, केशव मुझे स्मरण आ रहा है,,लेकिन उसमें क्या,,?
केशव मुस्कुराए और बोले,,
उस सेल्फी पर मगध से लेकर ,पांचाल राज्य तक के लोगों से nice,और awesome लिखा था,,।
लेकिन पार्थ ,उस पर तुम्हारे ये कुटुंबियों ने कुछ भी नहीं लिखा,,न लाइक दिया था।
ज्यादा नहीं तो लव का रिएक्शन भी दे सकते थे। ये तुम्हारे अपने नहीं है ये तुम्हे पांच गांव क्या ? पांच
मिनट का हॉटस्पॉट भी नहीं देंगे ।
,,नहीं ,पार्थ ये लोग करुणा के लायक नहीं है,,इन पर दया नहीं दिखाना चाहिए।
जीवन ओटीपी की तरह है।हर बार नए लिंक में नए ओटीपी काम आता है।पुराने वाले ओटीपी की
जीवन मात्र कुछ मिनट ही होता है।वैसे ही जैसे हर बार नए शरीर में पुरानी आत्मा ।
पार्थ ने अपना मोबाइल उठाया और लग गया काम से आज उसने तय कर लिया था कि शाम होते होते
कई रील देख डालना है।मै नहीं करूंगा उन सब को लाइक जो मेरे पोस्ट को स्क्रॉल करके निकल जाते
हैं।।

Pradeep Audichya

प्रदीप औदिच्य आयु 48 वर्ष शिक्षा bsc.MA LLB. व्यवसाय वकालत…

प्रदीप औदिच्य आयु 48 वर्ष शिक्षा bsc.MA LLB. व्यवसाय वकालत पठन पाठन में स्कूल समय से रुचि व्यवस्थित लेखन वर्ष 2020 से,, व्यंग्य रचना स्वदेश समूह में नियमित कॉलम प्रारंभ लगभग 300 से अधिक व्यंग्य, स्वदेश,अमर उजाला,दैनिक ट्रिब्यून,जागरण सहित विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित,, पीपुल्स समाचार चैनल के लिए भी व्यंग्य लेखन,, पता MIG 4 housing board colony near budhe balaji mandir Guna Madhya Pradesh 473001

Comments ( 1)

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डॉ मुकेश 'असीमित'

13 minutes ago

मोबाइल डेटा, रील, लाइक, कमेंट और सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा पर आधारित प्रदीप औदिच्य की रोचक व्यंग्य रचना—‘उठो पार्थ, अपना मोबाइल उठाओ’।