ज्ञान बांटने वालो के तरकश में किस्म किस्म के तीर !
डॉ प्रेमचंद द्वितीय
कार्यालय के बड़े बाबू कपिश जी ने एक स्लोगन अपनी कुर्सी के ठीक ऊपर चिपका दिया था जिस पर लिखा था हमें ज्ञान न बांटे हम स्वयं ज्ञानी है ।इस स्लोगन को पढ़कर जो भी उनसे काम कराने आते सीधे-सीधे काम बताते और जुमला कसते की बाबूजी आप ज्ञानी हैं लेकिन एक बात यह है कि इस कागज के इस तरह पुरावे होंगे, मुंह इस तरह मिलेंगे का ज्ञान परोस देते थे। इस पर बड़े बाबू उन पर झल्लाते और कहते हैं यहां पर ज्ञानियों की कमी नहीं है। डग डग रोटी , पग पग नीर की भांति हर स्थान जगह पर ज्ञान बांटने वाले मिल जाते है ,जो अपने अज्ञान से ज्ञान का रायता फैलाकर उच्च किस्म के ज्ञान का कचरा कर देते है।
बड़े बाबू के ज्ञानोदय के स्लोगन को पढ़कर पं शिवनारायण जी बोले साला बड़ा बाबू जानता वानता कुछ भी नहीं है ,लेकिन खुद को ज्ञानी चस्पा कर ज्ञान का मखौल उड़ा रहा है ।लेकिन करें क्या , उसके पास ऑफिस की बड़ी कुर्सी है और इसी कुर्सी के वजूद से साहब को भी अपना ज्ञान अज्ञान ,विज्ञान, रणनीति ज्ञान, कूटनीति ज्ञान के जरिए हर चीज को अपनी माफिक उन्हें संज्ञान करा देता है। और साब भी जिन्हें कोरे सिग्नेचर का ज्ञान होने से बड़े बाबू के किस्म किस्म के ज्ञान के तड़के से खुद कड़क बजते हैं। लेकिन बड़े बाबू के सामने उन्हें अज्ञानी ही बनना पड़ता है चूंकि सिग्नेचर तो वह करते हैं लेकिन हर मैटर में ज्ञान और प्राण दोनों ही बड़े बाबू के होते हैं ।
ज्ञान बांटने के कारण बड़े बाबू से कोई किला नहीं लड़ाता है जो भी अफसर आता, बड़े बाबू अपने ज्ञान की पोटली उनके पास रख देते ,यदि वे उनके ज्ञान को तवज्जो न दे तो बड़े बाबू उन्हें अपने ज्ञान की रोशनी से उन्हें अंधेरे में रखने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते हैं ।
इस पर सुनील भैया बोले ज्ञान बांटने और ज्ञानी होने का प्रमाण पत्र प्रमाण तो रील ,व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम यूनिवर्सिटी ने हर हिंदुस्तानी के लिए जारी कर दिया है। सोशल मीडिया से लगता है कि हर नागरिक बुद्धिमान और ज्ञानी है ।उसके पास ज्ञान के तरकश में तरह-तरह के तीर है जो समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्र में चलते हैं ।
वे बोले कोई बीमार पड़कर देखें उनका समाचार जानने वाले की बातें ज्ञान से भरी पड़ी रहती है। इलाज के डॉक्टर का पूछो तो समाचार लेने वाले का ज्ञान ही दुनिया भर के डॉक्टर को बताने से नहीं चूकता है ।जिसका इलाज चल रहा है उसे अज्ञानी बता कर डॉ गुलाटी जैसे झोला छाप डॉक्टर से इलाज का कहकर मरीज का माथा ठनकाने से नहीं चूकता है ।कई ज्ञान परोसने वाले तो देसी इलाज के नुस्खे बताकर एलोपैथी की एलोवेरा से तुलना कर एलोपेथी को मूली मैथी से ज्यादा अहमियत नहीं देते हैं। ज्ञान के जरिए अपनी राय देने वाले नुस्खे का काड़ा पिलाकर और फिजियोथेरेपी की जगह देसी कसरत करने और हर मर्ज का इलाज जानने वाले ज्ञानी अपना वर्जन मरीज के सामने रखे बगैर नही जाते हैं।
इस पर नरेंद्र स्वामी जी बोले नेता बनने के सुलेमानी कीड़े से आजीज हो चुके नेताजी की नेतृत्व में दाल नहीं गली तो उन्होंने ज्ञान वटी ,का सहारा लिया और जहां भी किसी का भी समाचार लेने जाते बोलते मैंने हार्ट के बाईपास को बाय-बाय कर दिया है ,इसलिए की लहसुन अदरक और नींबू के घोल को दो-तीन माह लिया तो हार्ट के सभी ब्लॉक अनब्लॉक हो गए। उन्होंने शुगर को करेला और जामुन वटी से तो बीपी को मॉर्निंग वॉक करने और उठक बैठक जैसे एक्सरसाइज कर बीपी की बीप बजने से रोकने का आइडिया बता दिया ।अरे हद तो उस वक्त हो गई जब पड़ोसी का पैर स्लीप होने से वे बिस्तर पर स्लिप हो गए तो उन्होंने अपने ज्ञान से फ्रेक्चर वाले डॉ तलहटी के इलाज को लाइलाज बता कर बाबू भाई से पट्टा लगाने और मालिश करा कर फैक्चर के पिक्चर को ही पलट दिया और एक-रे को तो फेक रे बता कर अपने फेक्चर ज्ञान को फैक्ट ज्ञान बता दिया।
जब ज्ञानियों की बात चल रही थी तो अज्ञानी चबूतरा के मैनेजर मनोज बाबू बोले जन्म, मरण ,परण सभी जगह ज्ञान देने वाले मिल जाते हैं। पड़ोसी बसंती लाल जी के निधन पर अज्ञानी चबूतरा के लोग अपने बांटने वाले ज्ञान को लेकर पहुंचे और बसंती के निधन का पल भर भी उल्लेख न करते हुए पूछा कि उनके दाह संस्कार में कितने क्वींटल लकड़ी लगी और यह बताने पर की ज्यादा लगी है तो उसे पर बोले शांति महाराज होते तो लकड़ी इतनी नहीं लगती। अगला कोई मरे तो ध्यान रखना ।और हां अब नुक्ते से लोग उकता गए हैं अब तो कुछ मिलने जुलने वालों को किसी होटल में जीमा देना । अरे उन्होंने तो बसंती के निधन को हलके में लेकर तरह-तरह के ज्ञान बांटकर इस चबूतरे के अज्ञानियों ने उनकी औलाद पर न जाने कौन-कौन से सिस्टम लाद दिए।
इस पर पवन बाबू बोले। ज्ञान बांटने वालों के ज्ञानचंद के जुड़वा भाई रायचंद और सलाह देने वाले न जाने कितने नुस्खा राय सलाह देने में पारंगत होते हैं। इनके की नुस्खे की नुस्ख निकालने वाले उनके ज्ञान से तौबा करने लगते हैं और हां में हां मिलाकर उनसे छुटकारा पाते हैं ।यही नहीं उनका ज्ञान, विज्ञान,संज्ञान और तरह-तरह के ज्ञान की राजनीति, रणनीति से जुड़ा है लेकिन ज्ञान के आगे, अ , लगाकर हर कस्बे में अज्ञानी चबूतरा, अज्ञानी ओटला, अज्ञानी पटिया ,अज्ञानी चौपाल ,अज्ञानी सीनियर सिटीजन ज्ञान बांटने वाले मिल जाते हैं जो हर क्षण अपने ज्ञान के पिटारे के चूरण की पूड़ी जेब में रखते हैं और बगैर मांगे, बगैर ऑफर के बांट देते हैं ।ताकि उनके छद्म ज्ञान की चर्चा कस्बे में होती रहे और कथित ज्ञान की ज्योति इन अज्ञानियों से जलती रहे !
..……..
Comments ( 0)
Join the conversation and share your thoughts
No comments yet
Be the first to share your thoughts!