नारी शक्ति गीत: ना रुके, ना झुके | महिला सशक्तीकरण का प्रेरणादायक गीत

नारी शक्ति: ना रुके, ना झुके—साहस, ममता और संकल्प को समर्पित प्रेरणादायक गीत

नारी केवल एक संबंध या भूमिका का नाम नहीं है। वह ममता भी है, संघर्ष भी; करुणा भी है, साहस भी; परिवार की धुरी भी है और समाज के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति भी। इसी बहुआयामी व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और अदम्य संकल्प को स्वर देता है मेरा नया गीत—“नारी शक्ति, ना ही रुके, ना ये कभी झुके।”

यह एक भावपूर्ण और प्रेरणादायक सिनेमैटिक गीत है, जो उन सभी बेटियों, माताओं, बहनों और कर्मशील महिलाओं को समर्पित है, जिन्होंने जीवन की कठिन परिस्थितियों के बीच भी अपने सपनों, कर्तव्यों और आत्मसम्मान को जीवित रखा।

गीत सुनें

पूरा गीत Dr. Mukesh Aseemit Creations YouTube चैनल पर सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

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इस गीत के पीछे की कहानी

हमारे आसपास ऐसी असंख्य महिलाएँ हैं, जिनके संघर्षों की चर्चा किसी समाचार में नहीं होती और जिनकी उपलब्धियों के लिए मंच पर तालियाँ भी नहीं बजतीं। कोई माँ अपने सपनों को पीछे रखकर बच्चों का भविष्य सँवारती है, कोई बेटी सामाजिक बंधनों को पार करके अपनी पहचान बनाती है, कोई शिक्षिका ज्ञान का दीप जलाती है, कोई वैज्ञानिक नए आकाश खोजती है और कोई सैनिक सीमा पर राष्ट्र की रक्षा करती है।

इन सभी रूपों में एक बात समान दिखाई देती है—रुकने से इनकार और परिस्थितियों के सामने झुकने से इनकार। इसी भावना से गीत की केंद्रीय पंक्तियाँ जन्मीं:

नारी शक्ति, ना ही रुके,
ना ये कभी झुके।
ठान ले जो अपने मन में,
छू ले आसमान…

गीत की रचना करते समय उद्देश्य नारी को केवल त्याग और ममता की पारंपरिक छवि तक सीमित रखना नहीं था। उसके वात्सल्य के साथ उसकी निर्णय-क्षमता, प्रतिभा, स्वाभिमान, नेतृत्व और आधुनिक उपलब्धियों को भी समान महत्व देना आवश्यक लगा। इसलिए गीत में माँ और जननी के साथ शिक्षिका, वैज्ञानिक, सैनिक और कर्मशील आधुनिक नारी के रूप भी उभरते हैं।

महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ

महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल प्रशंसा के कुछ शब्द कहना या किसी विशेष अवसर पर शुभकामना संदेश देना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है—महिलाओं को शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा, निर्णय लेने की स्वतंत्रता और अपनी प्रतिभा विकसित करने के समान अवसर मिलना।

सशक्त नारी वह है जो अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं ले सके; जो भय, भेदभाव और असमानता से मुक्त होकर आगे बढ़ सके; जिसकी बात परिवार और समाज में सुनी जाए; और जिसकी उपलब्धियों का मूल्यांकन उसके लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और कर्म के आधार पर हो।

यह गीत किसी संघर्ष को स्त्री और पुरुष के बीच प्रतिस्पर्धा के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। इसका संदेश सहयोग, सम्मान और समान अवसर का है। जब एक नारी शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होती है, तब केवल उसका जीवन नहीं बदलता—पूरा परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियाँ अधिक समर्थ बनती हैं।

गीत की संगीत-शैली और विधा

“नारी शक्ति” को प्रेरणादायक भारतीय सिनेमैटिक गीत की शैली में संगीतबद्ध किया गया है। इसकी शुरुआत भावपूर्ण और अपेक्षाकृत शांत संगीत से होती है, ताकि शब्दों का भाव सीधे श्रोता तक पहुँच सके। इसके बाद स्ट्रिंग्स, बाँसुरी, पियानो, भारतीय तालवाद्यों और कोरस का क्रमिक विस्तार गीत को एक व्यापक एवं ऊर्जावान स्वरूप प्रदान करता है।

अंतरों में संगीत को संवेदनशील और सहज रखा गया है, जबकि कोरस में सामूहिक स्वर नारी के सामूहिक आत्मविश्वास का प्रतीक बनते हैं। अंतिम चरण में ऑर्केस्ट्रल विस्तार गीत को उत्सवधर्मी और प्रेरक उत्कर्ष देता है। इस प्रकार इसकी शैली में Indian cinematic, inspirational anthem, soft orchestral fusion और motivational Hindi song के तत्व एक साथ सुनाई देते हैं।

संगीत का उद्देश्य शब्दों पर हावी होना नहीं, बल्कि उनके भाव को विस्तार देना है। कहीं ममता की कोमलता है, कहीं संघर्ष की दृढ़ता और कहीं उपलब्धि का गौरवपूर्ण उत्कर्ष।

“नारी शक्ति” गीत के संपूर्ण बोल

मुखड़ा

नारी शक्ति, ना ही रुके,
ना ये कभी झुके।
ठान ले जो अपने मन में,
छू ले आसमान…
छू ले आसमान॥

हर पल अडिग वीरांगना,
साहस उसकी शान।
दुःख सहकर भी हँसती जाए,
रखती ऊँचा मान॥

कोरस

नारी है… बलशाली है ये…
शक्ति जग में लाई है।
नारी है… उजियाली है ये…
जीवन-ज्योत जगाई है॥

अंतरा 1—संघर्ष

धूप चढ़े तो छाँव बने,
आँधी में बन ढाल।
अपने आँसू पीकर भी,
भरती सबकी थाल॥

रात अँधेरी जितनी हो,
उतना उसका मान।
अपने श्रम से लिख देती,
नव भारत की शान॥

ब्रिज

दुःख भी सहे…
चुप भी रहे…
फिर भी सदा मुस्काती रहे।
हर इक आँसू मोती बनकर,
जीवन को महकाती रहे॥

कोरस

नारी है… बलशाली है ये…
शक्ति जग में लाई है।
नारी है… उजियाली है ये…
जीवन-ज्योत जगाई है॥

अंतरा 2—ममता और संकल्प

कभी पर्वत-सी अटल बने,
अडिग रहे विश्वास।
कभी नदिया बन कल-कल बहती,
भर दे जीवन-श्वास॥

कभी बने वह दीप अँधेरों में,
कभी बने अरमान।
उसकी गोदी में पलता है,
सपनों का संसार॥

ब्रिज

कर प्रणाम, वंदन जननी,
जिससे है संसार।
ममता, करुणा, त्याग, समर्पण—
जीवन का आधार॥

जीवन की हर धड़कन में,
उसका ही सम्मान।
उससे ही मुस्काता जग,
उससे ही पहचान॥

अंतरा 3—आधुनिक नारी

सीमा पर जब वर्दी पहने,
बनती वीर महान।
शिक्षक बन जब दीप जलाए,
बाँटे सबको ज्ञान॥

विज्ञान के नभ में उड़ती,
छू ले नया विहान।
प्रतिभा के पंख लगाकर,
भरती नई उड़ान॥

बड़ा कोरस

नारी शक्ति… ना ही रुके…
ना ये कभी झुके।
ठान ले जो अपने मन में,
छू ले आसमान…
छू ले आसमान…

अंतरा 4—मानवता

नारी बाँधे प्रेम-सूत्र में,
सारा यह संसार।
उससे खिलते रिश्ते सारे,
उससे घर-परिवार॥

नारी बिन यह जग सूना है,
नारी जग की जान।
धरती महके, अम्बर चहके,
उससे जग की शान॥

वैदिक उत्कर्ष

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते,
रमन्ते तत्र देवताः।
जहाँ नारी का मान रहे,
वहीं बसें देवता॥

सम्मानित हो हर बेटी,
सम्मानित हर माँ।
नारी के चरणों में बसता,
मानव धर्म महान॥

अंतिम कोरस

नारी शक्ति, ना ही रुके,
ना ये कभी झुके।
ठान ले जो अपने मन में,
छू ले आसमान…
छू ले आसमान॥

नारी है… बलशाली है ये…
शक्ति जग में लाई है।
नारी है… उजियाली है ये…
जीवन-ज्योत जगाई है॥

जय नारी…
जय जननी…
जय जीवन…
जय हिन्द…

गीत का उद्देश्य

इस गीत का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि श्रोताओं के भीतर सम्मान, कृतज्ञता और आत्मचिंतन का भाव जगाना है। हम अपने जीवन में उन महिलाओं के योगदान को पहचानें, जिनकी मेहनत अक्सर सामान्य मानकर अनदेखी कर दी जाती है। बेटियों को सपने देखने का साहस मिले, माताओं के त्याग को सम्मान मिले और प्रत्येक महिला को अपनी क्षमता सिद्ध करने का समान अवसर मिले—यही इस रचना की मूल भावना है।

गीत का मुखड़ा सरल और स्मरणीय रखा गया है, ताकि यह केवल सुना न जाए, बल्कि प्रेरक उद्घोष की तरह लोगों की स्मृति में भी रहे। “ना ही रुके, ना ये कभी झुके” किसी एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का संदेश है जो बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ना चाहता है।

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“नारी शक्ति” सुनें:
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गीत सुनने के बाद Comment में अवश्य बताइए कि इसकी कौन-सी पंक्ति या भाव आपको सबसे अधिक प्रभावित कर गया। इसे अपने जीवन की उस प्रेरणादायक महिला के साथ साझा कीजिए, जिसका साहस, ममता या संघर्ष आपके लिए मिसाल है।

जय नारी। जय जननी। जय जीवन। जय हिन्द।

डॉ. मुकेश ‘असीमित’

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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