घुटनों के दर्द का घरेलू इलाज: महिलाओं के लिए आसान उपाय और डॉक्टर की सलाह

क्या सुबह बिस्तर से उठते ही आपके घुटने अकड़ जाते हैं? सीढ़ियाँ चढ़ते समय दर्द होता है? कुर्सी से उठते समय घुटनों से आवाज आती है या घर का काम पूरा करते-करते पैरों में दर्द और भारीपन बढ़ जाता है?

यदि ऐसा है, तो इसे केवल बढ़ती उम्र की सामान्य समस्या समझकर अनदेखा न करें। घुटनों का दर्द कई कारणों से हो सकता है। शुरुआत में जीवनशैली में कुछ बदलाव, वजन नियंत्रण और सही व्यायाम से काफी राहत मिल सकती है। लेकिन लगातार या बढ़ते हुए दर्द में सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जाँच भी जरूरी है।

भारतीय महिलाओं में घुटनों का दर्द अधिक क्यों दिखाई देता है?

भारतीय महिलाओं की दिनचर्या में कई ऐसे काम शामिल होते हैं जिनमें घुटनों को बार-बार मोड़ना पड़ता है। लंबे समय तक रसोई में खड़े रहना, बार-बार सीढ़ियाँ चढ़ना, जमीन पर बैठकर काम करना, पालथी मारकर बैठना, उकड़ूँ बैठना तथा नीचे बैठकर बार-बार उठना—ये सभी गतिविधियाँ दर्द से प्रभावित घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।

इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कारण भी महत्त्वपूर्ण हैं:

  • शरीर का वजन अधिक होना
  • नियमित शारीरिक गतिविधि न करना
  • जाँघ की मांसपेशियों का कमजोर होना
  • उम्र के साथ जोड़ में घिसाव यानी ऑस्टियोआर्थराइटिस
  • घुटने की पुरानी चोट
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस या अन्य प्रकार का गठिया
  • गलत जूते या घिसी हुई चप्पल पहनना
  • मेनोपॉज के बाद शरीर में होने वाले बदलाव
  • विटामिन-डी की कमी जैसी पोषण संबंधी समस्याएँ

ध्यान रखें कि केवल विटामिन-डी या कैल्शियम की कमी को हर प्रकार के घुटने के दर्द का कारण मानना उचित नहीं है। आवश्यकता होने पर डॉक्टर की सलाह से जाँच करानी चाहिए।

क्या घुटनों से आवाज आना बीमारी का संकेत है?

घुटने मोड़ते या कुर्सी से उठते समय कभी-कभी कट-कट अथवा चरमराहट जैसी आवाज आ सकती है। केवल आवाज आना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता।

लेकिन आवाज के साथ दर्द, सूजन, अकड़न, घुटने का बार-बार मुड़ जाना या चलने में अस्थिरता हो, तो जाँच करानी चाहिए। ऑस्टियोआर्थराइटिस में दर्द, अकड़न और घुटने से आवाज आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसकी जानकारी NIAMS पर भी उपलब्ध है।

घुटनों के दर्द में घर पर राहत पाने के उपाय

1. गर्म या ठंडी सिकाई सही समय पर करें

यदि घुटने में लंबे समय से दर्द और अकड़न है, तो 10 से 15 मिनट की हल्की गर्म सिकाई आराम दे सकती है।

यदि अचानक चोट लगी हो अथवा घुटना सूजा हुआ और गर्म हो, तो कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई करना अधिक उपयोगी हो सकता है। बर्फ को सीधे त्वचा पर न रखें। NHS भी शुरुआती दर्द और सूजन में कपड़े में लपेटे हुए कोल्ड पैक के उपयोग की सलाह देता है।

बहुत गर्म पानी, हीटिंग पैड या गर्म बोतल को सीधे त्वचा पर लगाने से बचें, विशेषकर यदि त्वचा की संवेदना कम हो या मधुमेह हो।

2. घुटनों पर अनावश्यक दबाव कम करें

बार-बार सीढ़ियाँ चढ़ने, उकड़ूँ बैठने और जमीन पर बैठकर काम करने से बचें। पूजा, भोजन या घरेलू कार्यों के लिए संभव हो तो कुर्सी अथवा ऊँचे स्टूल का उपयोग करें।

बहुत नीचे वाले सोफे, पलंग या कुर्सी से उठने में घुटनों पर अधिक जोर पड़ता है। ऐसी कुर्सी चुनें जिसकी ऊँचाई पर्याप्त हो और जिसमें बैठकर उठना आसान हो।

लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें। बीच-बीच में पैर सीधा करें और आराम से कुछ कदम चलें।

3. वजन नियंत्रित रखें

शरीर का अतिरिक्त वजन घुटनों जैसे भार सहने वाले जोड़ों पर दबाव बढ़ाता है। अधिक वजन वाले व्यक्ति में थोड़ा वजन कम होने से भी दर्द और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार हो सकता है। वजन नियंत्रण और व्यायाम को घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रबंधन का महत्त्वपूर्ण भाग माना जाता है। NIAMS की जानकारी भी इसका समर्थन करती है।

वजन कम करने के लिए भूखे रहने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय:

  • मीठे पेय और अधिक चीनी कम करें
  • तला हुआ तथा अत्यधिक तेल वाला भोजन सीमित करें
  • बार-बार नमकीन और पैकेट वाले स्नैक्स खाने से बचें
  • भोजन में दाल, सब्जियाँ, सलाद और फल शामिल करें
  • पर्याप्त प्रोटीन लें
  • भोजन की मात्रा और समय पर ध्यान दें

यदि आपको मधुमेह, किडनी, लिवर या कोई अन्य बीमारी है, तो आहार में बड़ा परिवर्तन करने से पहले डॉक्टर अथवा आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।

4. पूरी तरह आराम करने के बजाय हल्का व्यायाम करें

घुटने के दर्द में कई दिनों तक पूरी तरह आराम करते रहना हमेशा सही नहीं होता। इससे जाँघ की मांसपेशियाँ कमजोर हो सकती हैं और जोड़ पर दबाव बढ़ सकता है। नियमित तथा सही तरीके से किया गया व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत करने और जोड़ की गतिशीलता बनाए रखने में सहायक होता है। American Academy of Orthopaedic Surgeons भी आर्थराइटिस में उचित व्यायाम और मांसपेशियों की मजबूती के लाभ बताती है।

व्यायाम 1: घुटने को नीचे दबाना

  1. बिस्तर पर पैर सीधा करके लेटें।
  2. घुटने के नीचे छोटा तौलिया रखें।
  3. घुटने को तौलिये की ओर नीचे दबाएँ।
  4. पाँच सेकंड तक रोकें और फिर ढीला छोड़ दें।
  5. प्रत्येक पैर से 10 बार करें।

व्यायाम 2: बैठकर पैर सीधा करना

  1. पीठ को सहारा देकर कुर्सी पर बैठें।
  2. एक पैर को धीरे-धीरे सामने की ओर सीधा करें।
  3. पाँच सेकंड तक रोकें।
  4. पैर को धीरे से नीचे लाएँ।
  5. प्रत्येक पैर से 10 बार दोहराएँ।

व्यायाम के दौरान हल्का खिंचाव महसूस हो सकता है, लेकिन तेज दर्द, चक्कर, अस्थिरता या सूजन बढ़ने पर व्यायाम रोक दें। बीमारी, उम्र और दर्द के कारण के अनुसार उचित व्यायाम डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सीखना बेहतर है।

5. सही जूते और चप्पल पहनें

बहुत ऊँची एड़ी, घिसी हुई चप्पल या बिल्कुल पतली और बिना सहारे वाली चप्पल घुटने की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे जूते पहनें जो:

  • मुलायम और आरामदायक हों
  • पैर को सही सहारा दें
  • जिनकी पकड़ अच्छी हो
  • आकार में बहुत ढीले या तंग न हों
  • जिनका तलवा एक तरफ से घिसा हुआ न हो

घुटनों के दर्द में इन गलतियों से बचें

बिना सलाह रोज दर्द निवारक दवा लेना

कुछ दर्द निवारक दवाओं का लगातार या गलत मात्रा में सेवन पेट, किडनी, लिवर, रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए किसी परिचित की दवा या पुराने पर्चे के आधार पर लंबे समय तक दवा न लें।

सूजे हुए घुटने पर जोर से मालिश करना

तेज मालिश से दर्द और सूजन बढ़ सकती है। यदि घुटना लाल, गर्म या बहुत सूजा हुआ हो, तो मालिश करने के बजाय डॉक्टर से जाँच करवाएँ।

तेल और चूर्ण को स्थायी इलाज मान लेना

कुछ तेल, लेप या घरेलू नुस्खे थोड़े समय के लिए आराम दे सकते हैं, लेकिन वे घिसे हुए कार्टिलेज को दोबारा नया नहीं बना सकते। इन उपायों के कारण आवश्यक जाँच और सही उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए।

बिना आवश्यकता कैल्शियम लेना

हर घुटने का दर्द कैल्शियम की कमी से नहीं होता। कैल्शियम या विटामिन-डी की दवा जाँच, आयु, खानपान और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर है।

घुटने के दर्द में डॉक्टर को कब दिखाएँ?

निम्नलिखित परिस्थितियों में अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ से जाँच करवाएँ:

  • घुटना अचानक बहुत अधिक सूज जाए
  • घुटना लाल या गर्म हो
  • दर्द के साथ बुखार आए
  • चोट के बाद पैर पर वजन न रखा जा सके
  • घुटना बार-बार लॉक हो
  • चलते समय घुटना मुड़ जाए या साथ छोड़ने लगे
  • दर्द रात में भी लगातार बना रहे
  • घुटने का आकार बदलता दिखाई दे
  • दर्द लगातार बढ़ता जा रहा हो
  • दो से तीन सप्ताह के घरेलू उपायों के बाद भी राहत न मिले

हर मरीज को एक्स-रे, एमआरआई, इंजेक्शन या ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जाँच और आवश्यकता के अनुसार जाँच तय करते हैं। अधिकतर मरीजों को सही व्यायाम, वजन नियंत्रण, गतिविधियों में बदलाव, फिजियोथेरेपी और उचित उपचार से राहत मिल सकती है।

वीडियो में देखें पूरी जानकारी

घुटनों के दर्द के कारण, घरेलू उपाय, आसान व्यायाम और डॉक्टर को दिखाने वाले चेतावनी संकेतों को सरल भाषा में समझने के लिए पूरा वीडियो देखें:

▶️ घुटनों के दर्द का घरेलू इलाज—पूरा वीडियो यहाँ देखें

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निष्कर्ष

उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन घुटनों का दर्द चुपचाप सहते रहना आवश्यक नहीं है। घुटनों पर अनावश्यक दबाव कम करें, शरीर का वजन नियंत्रित रखें और सही व्यायाम से आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं।

घरेलू उपाय शुरुआती राहत दे सकते हैं, लेकिन दर्द का सही कारण जानना भी उतना ही जरूरी है। समय पर जाँच और उचित उपचार आपको अधिक समय तक स्वस्थ, स्वतंत्र और सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

लेखक:
डॉ. मुकेश गर्ग
अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ
Health Ki Pathshala – Dr Mukesh Garg

चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। इसके आधार पर स्वयं निदान या दवा शुरू न करें। व्यक्तिगत जाँच एवं उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

क्या घुटनों के दर्द में गर्म सिकाई करनी चाहिए?

पुराने दर्द और अकड़न में हल्की गर्म सिकाई उपयोगी हो सकती है। अचानक चोट लगने या घुटना सूजा और गर्म होने पर शुरुआती समय में कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई की जा सकती है।

क्या घुटनों से आवाज आना गठिया का संकेत है?

केवल आवाज आना हमेशा गठिया का संकेत नहीं होता। यदि आवाज के साथ दर्द, सूजन, अकड़न, घुटने का लॉक होना या चलते समय अस्थिरता हो, तो डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।

घुटने के दर्द में कौन-सा व्यायाम करना चाहिए?

जाँघ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले हल्के व्यायाम उपयोगी हो सकते हैं। घुटने को तौलिये पर नीचे दबाना और कुर्सी पर बैठकर पैर सीधा करना शुरुआती व्यायाम हैं। तेज दर्द होने पर व्यायाम रोक दें।

क्या वजन कम करने से घुटनों का दर्द कम हो सकता है?

अधिक वजन होने पर वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव घट सकता है। इससे दर्द और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

घुटने के दर्द में डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

घुटना अचानक सूजने, लाल या गर्म होने, बुखार आने, चोट के बाद पैर पर वजन न रख पाने, घुटना लॉक होने अथवा दो से तीन सप्ताह में राहत न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएँ।

क्या हर मरीज को एक्स-रे या ऑपरेशन की जरूरत होती है?

नहीं। जाँच और उपचार मरीज के लक्षणों तथा शारीरिक परीक्षण पर निर्भर करते हैं। बहुत से मरीजों को व्यायाम, वजन नियंत्रण, जीवनशैली में बदलाव, फिजियोथेरेपी और उचित दवाओं से राहत मिल सकती है।

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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