“कलयुग वुड्ढा” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi Jun 2, 2020 Poems 0

कलयुग बुड्ढा हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित कुंडिली.अपने विचार लेख कविता प्रकाशन के लिए बात अपने देश की ब्लॉग साईट को चुने

हिन्दुस्तान हिंदी कविता महादेव प्रेमी द्वारा रचित

Mahadev Prashad Premi Jun 2, 2020 Poems 0

महादेव प्रेमी लिखित कविता शीर्षक "हिन्दुस्तान". बात अपने देश की पर अपने लेख विचार काव्य निशुल्क प्रकाशन के लिए सम्पर्क करे

“केसरिया परिधान ” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 31, 2020 Poems 0

“केशरिया परिधान”कुण्डली 6चरण केशरिया परिधान लखि,हर विपक्षी वेहाल,राज नीति कैसे चले,लेय वाल से खाल, लेय वाल से खाल,देख इस को पहिचानो,दिखे देश का भक्त,इसे आतंकी मानो, “प्रेमी”धारा लगा,कोई कैसे भी तरियां,चाहे हो निर्दोष,लाल कर दो केशरिया। रचियता- महादेव “प्रेमी” अगर आप पहेलिय पढने में या बूझने में रूचि रखते है तो मेरे द्वारा संकलित पहेली […]

“हरित वाटिका” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 31, 2020 Poems 0

“हरित वाटिका”कुण्डली 6चरण हरित वाटिका में युगल,कर रहे मेल मिलाप,होट परस्पर मिल रहे,कर रहे वार्तालाप, कर रहे वार्तालाप,मिली इनको आजादी,हिन्दु संस्क्रति भूल,बने पश्चिम के वादी, “प्रेमी”ये ही हाल कि,वालक और वालिका,नित्य देख मधुपर्व,घूमले हरित वाटिका। रचियता -महदेव “प्रेमी “ आपको हमारी कविताएं कैसी लग रही है,कृपया अपने विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में जरूर […]

“हाथ पैर यदि पास” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 27, 2020 Poems 0

“हाथ पैर यदि पास”कुण्डली 8चरण हाथ पैर यदि पास हों,मांग कभी ना भीख,साहस पंखों में जगा,नभ में उड़ना सीख, उड़ना नभ में सीख,कभी झोली न पसारो,कर्म कोइ भी करो,ताहि सो होय गुजारो, हाथ पैर यदि साथ,देय तो मांग न जइहैं,मांगन मरण समान, तु जीते जी नहिं मरिहैं, “प्रेमी”मांग न कभी,भी जब तक तन की आस,काम […]

“अपनी राह” हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

Mahadev Prashad Premi May 26, 2020 Poems 0

“अपनी राह”कुण्डली 8चरण अपनी राह स्वयम् चुनो,तव पाओगे मान,नदियां सागर में मिले,खो अपनी पहचान, खो अपनी पहचान,नदी सागर में मिलती,मीठे जल को छोड़,सभी सागर में ढलती, जव तक अपनी राह,चली पूज्यनिय बनी थी,प्रथक नदी के नाम,साथ सम्मान वही थी, “प्रेमी”मार्ग नेक ,तो सफल होयगी चाह,,सुयश चाहत हो यदि,मत छोडो अपनी राह। रचियता महादेव प्रेमी

“आलोचना प्रशंसा” हिंदी कविता महादेव प्रेमी

Mahadev Prashad Premi May 25, 2020 Poems 0

“आलोचना प्रशंसा”कुण्डली 8 चरण आलोचना अरु प्रशंसा,एक दूजे विपरीत,करते सव ही है सदा,यह दुनियां की रीत, यह दुनियां की रीत,न रीझ प्रशंसा सुनकर,निंदा कोई करै,कभी नहिं बोल उवल कर, स्तुती करने वालों, को मौका ना मिलेगा,निंदा करने चले,उ का सर ज़मीं झुकेगा, “प्रेमी” जग की रीत,देख मैंने की मन्शा,रीझो उवलो नांहि ,कि सुन आलोच प्रशंसा। […]