डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 13, 2026
शोध लेख
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एकात्म मानववाद भारतीय चिंतन की वह समन्वयवादी दृष्टि है जो मनुष्य को केवल आर्थिक इकाई नहीं बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा से बने समग्र अस्तित्व के रूप में देखती है। यह दर्शन व्यक्ति, समाज, संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को समग्र रूप में समझने की प्रेरणा देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 11, 2026
समसामयिकी
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एआई समिट के बाद राहुल गांधी के बयान से उठे विवाद ने केवल एक राजनीतिक बहस को नहीं जन्म दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि भारतीय राजनीति में विरोध और व्यवधान के बीच की रेखा कितनी धुंधली होती जा रही है। क्या लोकतंत्र में असहमति अब प्रदर्शन और सुर्खियों का खेल बनती जा रही है?
Dr Shailesh Shukla
Mar 8, 2026
समसामयिकी
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मध्य पूर्व में छिड़ा ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष केवल एक सैन्य टकराव नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कूटनीति और मानवीय संकट को गहराई से प्रभावित करने वाला भू-राजनीतिक तूफान बन चुका है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 28, 2026
News and Events
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एप्सटीन फाइल्स केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना हैं जो शक्ति और धन के शिखर पर बैठकर खुद को अजेय मान बैठती है। यह लेख सत्ता, सेक्स और नैतिकता के जटिल संबंधों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संदर्भ में परखता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 10, 2026
समसामयिकी
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सोना कोई उपयोगी वस्तु नहीं, बल्कि मानव आकांक्षाओं और असुरक्षाओं का सबसे चमकदार प्रतीक है। न वह भूख मिटाता है, न ठंड से बचाता है, फिर भी सदियों से उसे सबसे अधिक मूल्य दिया गया। इस लेख में सोने की बढ़ती कीमतों को बाज़ार की चाल नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक मान्यताओं का परिणाम बताया गया है। कैसे हमने सोने को सम्मान, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और विश्वास का पर्याय बना दिया—और बाज़ार ने इन्हीं भावनाओं को भुनाना सीख लिया। मंदिरों, बैंकों और आभूषणों में सिमटे सोने के माध्यम से यह रचना भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों पर गहन वैचारिक दृष्टि डालती है। यह लेख सोने से ज़्यादा मानव मन की कीमत पर सवाल उठाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jan 10, 2026
समसामयिकी
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“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।”
“जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।”
“हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।”
“इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 27, 2025
India Story \बात अपने देश की
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यह साल किसी कैलेंडर की तरह नहीं बीता, बल्कि अधूरी डायरी की तरह—जहाँ स्याही कम और धड़कन ज़्यादा थी। घटनाएँ बदलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा बदले हमारे डर, ग़ुस्सा और चुप्पियाँ।
यह साल हमें किसी नतीजे तक नहीं लाया, बल्कि सवालों की लंबी सूची सौंप गया—कि हम क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं और कब चुप रहते हैं।
आतंक, युद्ध, आस्था, कॉमेडी, सोशल मीडिया—हर मोर्चे पर यह साल हमें भीतर तक झकझोरता रहा। इतिहास बनता रहा, और हम बदलते रहे।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 6, 2025
समसामयिकी
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हवाई जहाज़ के टिकट बुक करते समय हम लोग बड़े भोले होते हैं। वेबसाइट पर लिखा होता है – “ऑन टाइम इज़ अ वन्डरफुल थिंग” और हम मान लेते हैं कि यह कोई वादा नहीं, वेद मंत्र है। क्रेडिट कार्ड से पैसा कटते ही हमें लगता है कि हमने अपने भाग्य पर भी एक “कन्फर्म […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 16, 2025
News and Events
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“कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक 779 जिलों में एक साथ उठते कदम, सरदार पटेल के सपने को फिर से जीवंत करेंगे—यह पदयात्रा सिर्फ दूरी नहीं, दिलों को जोड़ने की यात्रा है।”
“करमसद से एकता नगर तक 152 किलोमीटर की राष्ट्रीय पद यात्रा उन युवाओं के संकल्प की कहानी होगी, जो खादी पहनकर एकता, आत्मनिर्भरता और सेवा के मूल्यों को अपने जीवन में उतारने निकले हैं।”
“सरदार @150 यूनिटी मार्च सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का खुला निमंत्रण है—जहाँ हर कदम ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ का नारा बनकर गूँजेगा।”
Ram Kumar Joshi
Nov 5, 2025
India Story \बात अपने देश की
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देशभर में बढ़ते सड़क हादसे अब सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि हमारी संवेदनहीन व्यवस्था का आईना हैं।
जहाँ नियम पालन करने वाले मरते हैं, और व्यवस्था सिर्फ बयान जारी करती है।
ट्रैफिक पुलिस की आँखें खुली हैं — मगर देखती नहीं।
जब तक जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों में रहेगी, सड़कें श्मशान बनती रहेंगी।