आत्ममूल्यांकन रिश्ते का केंद्र हैं,तुम बदल गए हो पहले ऐसे नहीं थे

Priyanka Ghumara Jan 20, 2026 हिंदी लेख 1

“जहाँ दूरी पराजय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की विजय बन जाए— वहीं से रिश्तों की सच्ची परिभाषा शुरू होती है।”

आत्मबोध से विश्वबोध तक — ‘मैं’ से ‘हम’ बनने की चेतना यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 19, 2026 Darshan Shastra Philosophy 1

आत्मबोध मनुष्य की सबसे गहन यात्रा है — अहं से अनंत तक की। यह यात्रा हमें केवल स्वयं से नहीं, समस्त सृष्टि से जोड़ती है। जब चेतना ‘मैं’ के घेरे से बाहर निकलकर ‘हम’ का स्वर ग्रहण करती है, तभी करुणा, सहानुभूति और वैश्विक उत्तरदायित्व का जन्म होता है। विज्ञान और वेदांत दोनों आज इसी सत्य की ओर संकेत कर रहे हैं — भीतर की चेतना जागे बिना बाहरी संसार का संतुलन संभव नहीं।

युवा शक्ति और भारत की वैश्विक पहचान

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 19, 2026 हिंदी लेख 0

इक्कीसवीं सदी में भारत की वैश्विक पहचान उसकी युवा शक्ति गढ़ रही है—जो तकनीक, संस्कृति और नैतिकता को साथ लेकर चलती है। ब्रेन ड्रेन से ब्रेन सर्कुलेशन तक का यह सफ़र भारत को उपभोक्ता नहीं, समाधानकर्ता राष्ट्र बनाता है।

युवा शक्ति और राष्ट्र-निर्माण: भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 19, 2026 Self Help and Improvements 0

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा मन है—साहसी, आकांक्षी और साफ़ दिल वाला। राष्ट्र-निर्माण केवल सड़क-पुल नहीं, मूल्यों और चरित्र का निर्माण है। जब युवा सेवा, उद्यमिता और नीति-भागीदारी से जुड़ते हैं, तो भविष्य आकार लेता है।

विकास की सामूहिक कथा: जीन, समाज और चेतना के बीच बहती जीवन-धारा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 19, 2026 Science Talk (विज्ञान जगत ) 0

यह लेख विकासवाद को केवल जीन या व्यक्ति की सीमा में नहीं बाँधता, बल्कि एपिजेनेटिक्स, सामाजिक प्रजातियों और मानव सांस्कृतिक विकास के माध्यम से यह दिखाता है कि परिवर्तन हमेशा सामूहिक परिस्थितियों में आकार लेता है। जीन बीज हैं, पर उनका भविष्य समाज, पर्यावरण और समय तय करता है।

कहानी से सभ्यता तक: जब मनुष्य ने आग के चारों ओर संस्कृति रची

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 18, 2026 शोध लेख/विमर्श 1

मनुष्य ने जब अनुभव को कहानी में बदला, उसी क्षण सभ्यता का जन्म हुआ। आग के चारों ओर सुनाई गई पहली कथा से लेकर लोककथाओं, महाकाव्यों और आधुनिक डिजिटल कथाओं तक—स्टोरीटेलिंग वह अदृश्य धागा है जिसने स्मृति, संस्कृति और सामाजिक चेतना को एक साथ बाँधे रखा। यह लेख उसी निरंतर बहती कथा की यात्रा है, जहाँ कहानी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आत्मा है।

लिखा के लाए हैं…

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 16, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“जो लिखा है, वही होगा—बाक़ी सब तर्क अतिरिक्त हैं।” “किस्मत ने परमानेंट मार्कर से लिखा है साहब।” “इंसान से सहमति नहीं ली गई, फिर भी संविधान लागू है।” “कुछ लोग फूल लिखाकर लाए, कुछ काँटे समेटते रह गए।”

दो सभ्यताओं के युद्ध-गाथा : होमर का इलियड–ओडिसी और महाभारत का समानांतर संसार

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 14, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

इलियड और महाभारत केवल युद्ध की कथाएँ नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे संघर्षों का महाकाव्य हैं। जहाँ अखिलीस का क्रोध कथा को गति देता है, वहीं महाभारत में धर्म और अधर्म का द्वंद्व पूरी सभ्यता को झकझोर देता है। दो अलग भूगोल, दो अलग संस्कृतियाँ—पर प्रश्न वही: युद्ध के बाद मनुष्य क्या बनता है?