संघ-साहित्य: शब्दों में अनुशासन, विचारों में संवाद

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 17, 2025 Culture 0

संघ-साहित्य केवल प्रचार का उपकरण नहीं, बल्कि विचार की निरंतरता का प्रमाण है। यह शाखाओं से निकलकर पुस्तकों, पत्रिकाओं और डिजिटल संवादों में प्रवाहित होती एक चेतना है, जो अनुशासन के साथ आत्ममंथन भी सिखाती है। इन पन्नों में न केवल विचारों की गर्माहट है, बल्कि वह मौन भी है जो संस्कार बनकर पीढ़ियों में उतरता है। यह साहित्य नारे नहीं, आत्मसंवाद रचता है — और यही इसकी स्थायी प्रासंगिकता है।

भीतर का समुद्र-मंथन: विष से अमृत तक की आत्मिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 30, 2025 Culture 0

समुद्र-मंथन की कथा हमें बताती है कि जीवन की साधना सबसे पहले विष का सामना है—आलोचना, उपहास और असुविधा का। लेकिन यही विष जब धारण कर लिया जाए तो भीतर से रत्न प्रकट होते हैं—प्रतिभा, विवेक, गरिमा, समृद्धि और अंततः अमृत। यह कथा हमें याद दिलाती है कि हर संघर्ष एक नया जागरण है और भीतर की देवी ही हमारी असली शक्ति है।

सामवेद—नाद ब्रह्म, ध्वनि से समाधि तक

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 26, 2025 Culture 0

सामवेद हमें सिखाता है कि शब्द तभी पूर्ण होते हैं जब वे सुर और लय में ढलकर कंपन बनें—वही कंपन मन को विन्यस्त करता है, ऊर्जा को संतुलित करता है और चेतना को निर्मल करता है। नाद-ब्रह्म का अर्थ है: ध्वनि ही दिव्य है; सुर से भीतर का शोर शांत होता है और मौन में अनहद नाद प्रकट होता है। जीवन को राग बनाइए—काम यज्ञ बने, संबंध उत्सव, और प्रकृति गुरु।

नवरात्र : नई ऊर्जा और शक्ति जागरण का पर्व

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 17, 2025 Culture 0

नवरात्र केवल देवी उपासना का अवसर नहीं, बल्कि आत्मबल और चेतना जागरण का पर्व है। नौ रातें हमें याद दिलाती हैं कि शक्ति हमारे भीतर ही है—साहस, करुणा, विवेक और धैर्य के रूप में। प्राचीन ग्रंथों की तरह यह पर्व भी अमर संदेश देता है—अपने भीतर के अंधकार को पहचानो और उसे परास्त कर दिव्यता की ओर बढ़ो। यही नवरात्र का शाश्वत सत्य है।

ग्रहण : आत्मचिंतन की छाया में सूर्य और चंद्र

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 8, 2025 Culture 0

ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भीतर की छाया का प्रतीक है। राहु हमारे मन और ज्ञान दोनों को ग्रसने की कोशिश करता है — कभी भावनाएँ मलिन करता है, कभी विवेक धुँधला। सूर्य और चंद्र की यह लीला हमें आत्मचिंतन सिखाती है: छाया चाहे गहरी हो, प्रकाश लौटता अवश्य है।

राधाष्टमी : राधा-कृष्ण प्रेम की अनंत व्याख्या

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 31, 2025 Art and Craft 0

राधाष्टमी केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण की परम व्याख्या है। राधा-कृष्ण का मिलन आत्मा और परमात्मा का प्रतीक है। उनके प्रेम में अधिकार नहीं, समर्पण है; वियोग में भी साधना है। यही निष्कलुष प्रेम हमें सिखाता है कि प्रेम का असली सौंदर्य त्याग और अर्पण में है।

📄

त्रिम्बकेश्वर से जुडी पौराणिक कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 10, 2021 Blogs 0

त्र्यंबकेश्वर से संबंधित दो कथाएं हैं। एक कहानी पद्म पुराण के अनुसार सिंहस्थ पर्व के बारे में है। कहानी १  सदियों पहले भारत में देवी-देवता विचरण करते थे। उन्होंने विभिन्न कठिनाइयों के समय यहां रहने वाले संतों और लोगों की मदद की, खासकर राक्षसों से जो उपद्रव कर रहे थे। हालाँकि, इस लड़ाई में आम […]

New Trend in Indian Handicrafts

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 29, 2020 Art and Craft 2

हस्तशिल्प (handicraft) क्षेत्र काफी वर्षों से विकास की ओर अग्रसर है लेकिन पूरे विश्व में आये कोरोना संकट में पिछले ६ महीने से और उद्योगों की तरह इस उद्योग पर बी काफी असर पड़ा है. अब धीरे धीरे यहाँ उद्योग वापस अपनी रफ्तार पकड़ने लगा है । इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत के […]

कुंडलिनीः अवचेतन शक्ति सामर्थ्य

Dr Shree Gopal Kabra Aug 15, 2020 Blogs 0

कुंडलिनीः अवचेतन शक्ति सामर्थ्य डॉ. श्रीगोपाल काबरा के द्वारा कुंदिलिनी की अवधारणा का सटीक विश्लेष्ण. अपने लेख विचार कविता आदि के प्रकाशन के लिए सम्पर्क करे [email protected]

जानिये दाल बाटी चूरमा का इतहास

डॉ मुकेश 'असीमित' May 16, 2020 Culture 0

आइये जानते हैं दाल बाटी चूरमा का अविष्कार क्यों, कहाँ, कब और कैसे हुआ :– आप अगर राजस्थान के निवासी है तो स्वाभाविक है इस राजस्थानी व्यंजन के नाम से आपका बचपन से ही पाला पडा है. मूलतः राजस्थान का यह व्यंजन अब विश्ब भर में अपनी धूम मचा रहा है. ये भी पढ़े बाटी […]