डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 18, 2025
Important days
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धनतेरस को केवल खरीददारी का पर्व नहीं, बल्कि आरोग्य दीपोत्सव के रूप में मनाने का संदेश देता यह आलेख बताता है कि धन्वंतरि देव स्वास्थ्य, संयम और आत्मज्ञान के प्रतीक हैं। सोने से अधिक मूल्यवान है तन–मन का स्वास्थ्य, और असली दीप वह है जो भीतर जलता है — स्वच्छता, संयम और संतुलन के रूप में। यही है धनतेरस का शाश्वत अर्थ।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 17, 2025
Culture
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संघ-साहित्य केवल प्रचार का उपकरण नहीं, बल्कि विचार की निरंतरता का प्रमाण है। यह शाखाओं से निकलकर पुस्तकों, पत्रिकाओं और डिजिटल संवादों में प्रवाहित होती एक चेतना है, जो अनुशासन के साथ आत्ममंथन भी सिखाती है। इन पन्नों में न केवल विचारों की गर्माहट है, बल्कि वह मौन भी है जो संस्कार बनकर पीढ़ियों में उतरता है। यह साहित्य नारे नहीं, आत्मसंवाद रचता है — और यही इसकी स्थायी प्रासंगिकता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 10, 2025
Fashion,Food and Traveling
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जब श्रीमती जी के हाथ से चाय का दूसरा कप गायब हो और चेहरे पर व्रत का तेज़ नजर आने लगे, समझ जाइए — करवा चौथ है! ऐसे दिन पति का काम सिर्फ दो होता है: हर आधे घंटे में छत पर जाकर चाँद ढूँढना और गलती से भी पड़ोसी के पति को चाँद न समझ लेना। वरना व्रत खुलने से पहले ही जीवन बंद हो जाएगा।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 10, 2025
Fashion,Food and Traveling
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करवा चौथ का व्रत अब प्रेम का नहीं, रिचार्ज का उत्सव बन गया है — पतियों की “लाइफटाइम वैलिडिटी” हर साल नए गिफ्ट और पैक के साथ रिन्यू होती है। बाजार में चाँद और सेल एक साथ उगते हैं, और पत्नियाँ “नारायणी वाहिनी सिंघणी” बनकर पतियों से ईद का चाँद बनने की फरमाइश करती हैं। व्यंग्य की धार में लिपटा यह लेख बताता है कि रिश्तों में प्रेम से ज़्यादा अब प्लान और पैक महत्त्वपूर्ण हो गए हैं।
Vivek Ranjan Shreevastav
Oct 4, 2025
Important days
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विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘भोपाल’ का लेख “वे स्थान जहां नहीं किया जाता रावण दहन” भारतीय संस्कृति की विविधता और सहिष्णुता का जीवंत प्रमाण है। इसमें उन स्थानों का वर्णन है जहां रावण को खलनायक नहीं, बल्कि विद्वान, शिवभक्त और पूजनीय रूप में याद किया जाता है — जैसे बिसरख, मंडोर, कांकेर, विदिशा, कांगड़ा और गढ़चिरौली। लेख बताता है कि भारत में हर कथा का एक से अधिक पक्ष होता है।
Vivek Ranjan Shreevastav
Oct 3, 2025
Important days
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पहली अक्टूबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस हमारे समाज के उन वरिष्ठजनों को समर्पित है जिनके अनुभव और मार्गदर्शन के बिना वर्तमान और भविष्य अधूरा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि बुजुर्गों का सम्मान, सहयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करना हर नागरिक का कर्तव्य है। बदलती जीवनशैली, अकेलेपन और आर्थिक चुनौतियों के बीच उनके लिए सामाजिक सहयोग और कल्याणकारी योजनाएँ जीवन को गरिमामय बना सकती हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Oct 2, 2025
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दशहरा केवल पुतलों का त्योहार नहीं, यह मनुष्य के भीतर छिपे रावण और राम के बीच की लड़ाई है। रावण के पास सामर्थ्य, ज्ञान और वैभव था, लेकिन संतोष नहीं। राम के पास संघर्ष और वनवास था, लेकिन संतोष ही उनकी शक्ति थी। रावण इच्छाओं का दास था, राम आत्मसंयम के स्वामी। यही कारण है कि आज भी रावण जलाया जाता है और राम पूजित होते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 28, 2025
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बेटी दिवस पर यह व्यंग्य पूछता है—क्या बेटी के लिए कोई अलग डे बनाना ज़रूरी है? वो तो पिता के जीवन की सदा बहार वसंत है। उसके आंसू पिघला दें, उसकी हंसी दिल जीत ले। समाज उसे देवी कहता है, पर फैसले छीन लेता है। असली उत्सव तब होगा जब बेटियों को दिन नहीं, बल्कि पूरी दुनिया मिले।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 22, 2025
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नवदुर्गा ताण्डव स्तोत्रम् देवी शक्ति के नौ स्वरूपों का अद्भुत संगम है—शैलपुत्री की स्थिरता से लेकर सिद्धिदात्री की पूर्णता तक। यह स्तोत्र न केवल विनाश और सृजन की गाथा है, बल्कि भक्ति, तप, मातृत्व और करुणा का अलौकिक संगीतमय चित्र भी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 8, 2025
Culture
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ग्रहण केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भीतर की छाया का प्रतीक है। राहु हमारे मन और ज्ञान दोनों को ग्रसने की कोशिश करता है — कभी भावनाएँ मलिन करता है, कभी विवेक धुँधला। सूर्य और चंद्र की यह लीला हमें आत्मचिंतन सिखाती है: छाया चाहे गहरी हो, प्रकाश लौटता अवश्य है।