साठ साल का आदमी-कविता रचना

Prahalad Shrimali Nov 26, 2025 हिंदी कविता 0

साठ साल का आदमी दरअसल चलता-फिरता पेड़ है—अनुभव की जड़ों में धँसा, सद्भाव की शाखों से भरा और भीतर अब भी एक प्यारा बच्चा लिये हुए। उसकी बातें कभी जुगाली लगती हैं, पर उनमें समय का सच और जीवन का रस बहता है।”

जय भारत वंदेमातरम्!वंदेमातरम्!!

Prahalad Shrimali Nov 20, 2025 हिंदी कविता 0

यह कविता भारत-जन के महा स्वरों की गूंज “वंदेमातरम्” से शुरू होकर राष्ट्रहित, देशभक्ति, असल–नकली देशप्रेम, मीडिया की गिरावट, आतंकी तत्वों की धूर्तता और नागरिक कर्तव्यनिष्ठा जैसे मुद्दों पर तेज़ और सीधी चोट करती है। व्यंग्य और राष्ट्रभाव का मेल इसे और प्रभावी बनाता है। यह रचना केवल भावुक नहीं—एक चेतावनी, एक संदेश और एक सख्त सामाजिक निरीक्षण भी है।

प्रथम क्रांति भारत की (लक्ष्मी बाई )

Ram Kumar Joshi Nov 20, 2025 हिंदी कविता 1

यह कविता 1857 की क्रांति के उन ज्वलंत क्षणों को पुनर्जीवित करती है जब मंगल पांडे की हुंकार से लेकर झाँसी की रानी की तलवार तक हर दिशा में स्वाधीनता की आग भड़क उठी थी। साधु-संतों से लेकर बैरागियों तक सबने राष्ट्ररक्षा का संकल्प लिया। यह रचना वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस, अध्यात्म और बलिदान को स्मरण कराती है—एक ऐसी ज्वाला जो आज भी हमारी चेतना को आलोकित करती है।

आधुनिक संत-व्यंग्य कविता

Ram Kumar Joshi Nov 9, 2025 हिंदी कविता 0

बैरागी बन म्है फिरा, धरिया झूठा वेश जगत करै म्होरी चाकरी, क्है म्हानें दरवेश क्है म्हानें दरवेश, बड़ा ठिकाणा ठाया गाड़ी घोड़ा बांध, जीव रा बंधन बाध्या कह जोशी कवि राम, तपस्या कुण रे करणी मची संतों में होड़, पाप री खाडो भरणी (मची संतों में होड़, भक्त री लछमी हरणी।)

जय छठ मैया! राष्ट्रभक्ति और प्रकृति उपासना का दिव्य पर्व

Prahalad Shrimali Nov 1, 2025 Poems 0

छठ पर्व केवल आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति, राष्ट्र और संस्कृति के प्रति समर्पण का सामूहिक संकल्प है। यह लेख छठ मैया की भक्ति के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र प्रेम और जनकल्याण की भावना का संदेश देता है — जहां सूर्य उपासना के साथ-साथ देशभक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

प्रकाश है सनातन-कविता रचना

Prahalad Shrimali Oct 20, 2025 हिंदी कविता 0

“बहती प्रकाश की ओर अगर है ज़िंदगी, तो हर अंधकार भी एक पड़ाव मात्र है। जो दीप भीतर जलता है — वही अमर है, वही सत्य है, वही जीवन का उजास।”

तेरा लाल मां तुझे पुकारे

Vidya Dubey Oct 4, 2025 हिंदी कविता 2

कविता “तेरा लाल मां तुझे पुकारे” मां और पुत्र के भावनात्मक रिश्ते का सुंदर चित्र है। इसमें भक्त पुत्र अपने लाल वस्त्रों, फूलों, चुनरिया और माला के साथ मां से विनती करता है कि वह अपने नौ रूपों में आकर उसका जीवन प्रकाशमय करे। भक्ति, प्रेम और समर्पण से भरी यह कविता मां और भक्त के आत्मिक संवाद की मधुर प्रस्तुति है।

आउल जी को भेंट-हास्य व्यंग्य कविता

Ram Kumar Joshi Oct 4, 2025 हिंदी कविता 2

सूरत की राजनीति में खानदानी गुरुर ने ऐसा पेंच फँसाया कि ‘बाई’ की जगह ‘राड’ निकल गया। जनसभाओं में गुणगान करते-करते सीट हाथ से निकल गई। लोकसभा में आंख मिचमिचाना भारी पड़ गया और खानदानी कुर्सी भी खिसक गई। मोहब्बत की दुकानें खोलने चले थे, मगर कुछ घर टूट गए—अब जनता भी कह रही है, “हाय देवा, हमें बचा!”

कवि सम्मेलन की रिपोर्ट

Ram Kumar Joshi Sep 28, 2025 हिंदी कविता 0

कवि सम्मेलन की भव्य सजावट, मंच पर कवि और हजारों दर्शक—लेकिन कविता की जगह मसखरी और चुटकुले। थैलियों में नोट और कवियों का ठाठ, राष्ट्रकवियों की आड़ में हास्यास्पद हरकतें। यह व्यंग्य बताता है कि आज कवि सम्मेलनों का मकसद मनोरंजन और कमाई रह गया है, साहित्यिक संदेश नहीं।

आजाद गजल-देश पर एहसान उनके

Prahalad Shrimali Sep 21, 2025 हिंदी कविता 0

“आजाद ग़ज़ल” जीवन, समाज और राष्ट्र के विरोधाभासों का जीवंत चित्र खींचती है। माँ की गोद में मासूमियत है तो जंगलों के कटने पर पत्तों का प्रतिरोध भी। सूरज क्रोध में है, धरती धधक रही है, राजनीति अपने होश में है और सैनिक मौन प्रहरी की तरह खड़ा है।