“बेसहारा सर्वहारा चिन्तक” कविता रचना-डॉ मुकेश असीमित

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 24, 2025 Poems 0

एक मुखौटा जो क्रांति का नाम लेता है, और एक जाम जो सिंगल मॉल्ट से छलकता है। डॉ. मुकेश 'असीमित' की यह तीखी व्यंग्यात्मक कविता उन स्वघोषित चिंतकों पर करारा कटाक्ष है — जो शब्दों से सर्वहारा का राग अलापते हैं, पर जीवन में सुविधाओं के सहारे सांस लेते हैं। "बेसहारा सर्वहारा चिन्तक" सत्ता, दिखावे और वैचारिक दोगलेपन की उस रंगभूमि पर प्रहार करती है, जहाँ विमर्श क्लाइमेट चेंज और स्त्री अधिकारों पर होता है, पर ए.सी. और इंटर्न की सुविधा भी नहीं छोड़ी जाती। यह रचना नारे और नैतिकता के बीच के खोखलेपन को उजागर करती है — तीखी, मार्मिक और असीमित शैली में।

“रिश्ते (गजल ) दो छायाओं के बीच अनकहे जुड़ाव ।”

Babita Kumawat Jun 23, 2025 Poems 4

गजल – रिश्ते रिश्तों में विसाल उतना है जरूरी, मेरे लिए हर सिम्त में रिश्ते है जरूरी पर कुछ लोग बना देते है मैदान-ए-मतकल, मेरी ख्वाहिश है बनाना रिश्तों में खुशी हर पल कैद-ए-बाम मिलते कुछ लोग ऐसे है, जो पेच-ओ-खम रिश्तों में डाल देते हैं मैं हर शाख, हर खार, हर कली से मिली, […]

जंगल की पुकार: हरियाली, जीवन और संरक्षण की कविता

Dr. Mulla Adam Ali Jun 23, 2025 Blogs 0

जंगल केवल पेड़ों और जानवरों का घर नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यह हरियाली, शांति, और जैव विविधता का प्रतीक हैं, जो धरती को संतुलन और सांसें प्रदान करते हैं। लेकिन आज मानवीय लालच और विकास की अंधी दौड़ ने इन प्राकृतिक धरोहरों को संकट में डाल दिया है। प्रस्तुत कविता “जंगल […]

गणेश वंदना-छंद रचना-डॉ मुकेश असीमित

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 7, 2024 Poems 0

गणेश चतुर्थी विशेष… करहूँ स्तुति श्री गणपति, दीन दुखी के नाथ। दारुण दूर करहुं, तुम हो दीनों के साथ॥ विघ्न विनाशक नाम तुम्हारा, शुभ करहुं हर बार। दीनदयालु, कृपा बरसाओ, जग में हो उजियार॥ करबो वंदन पारवती सुत की, मंगल मूर्ति विशाल। विघ्न विनाशक नाम तुम्हारो, सिद्धि दाता प्रतिपाल॥ मूषक वाहन, मोदक भोगी, भाल चंद्र […]

रिश्ते -कविता हिंदी रचियता महादेव प्रेमी Hindi Poem Rishte

Mahadev Prashad Premi May 1, 2024 हिंदी कविता 0

जब रिश्तों में स्वार्थ और लोभ का ज़हर घुल जाता है, तब वर्षों से सहेजे संबंध भी टूटने लगते हैं। मनुष्यता की नींव पर जब निजी लाभ हावी हो जाता है, तो नाते सिर्फ समझौते बनकर रह जाते हैं। यह पंक्ति आज के स्वार्थी सामाजिक परिवेश की सच्चाई बयां करती है।

अंतर्द्वंद -कविता रचना -डॉ मुकेश

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2024 Poems 0

अंतर्द्वंद का यह संसार, मन के विराट आकाश में,  जहाँ चिंतन की गहराइयों में बसती है एक अनकही पीड़ा।  मनुष्य की अनगिनत अपेक्षाएँ, समाज के मानदंडों के बीच,  उलझती, घुलती, बिखरती, एक अनसुलझी पहेली की तरह।  इस द्वन्द्व की गलियों में, जहाँ हर कदम पर एक नई दुविधा,  मन के सिंहासन पर बैठा, एक अनदेखा, […]

तेरा दुःख तेरा ही होगा-कविता रचना-डॉ मुकेश गर्ग

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2024 Poems 0

“तेरा दुःख तेरा ही होगा “इस कविता के माध्यम से, यथार्थ को अपनाने और स्वयं के साथ खड़े होने की प्रेरणा देने का प्रयास किया गया है। उम्मीद है, यह आपको अपने दुखों से लड़ने और जीवन की सच्चाइयों को स्वीकार करने की शक्ति देगा। जीवन की राहों में दुःख के कांटे जब भी बिछे […]

अहसास कविता-रचनाकार डॉ मुकेश गर्ग

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 18, 2024 Book Review 0

अहसास की इस विस्तृत वादी में, जहाँ कण कण में सुकून का सागर छिपा है,वहाँ एक परिंदा, अपने अस्तित्व की छाया में, स्वच्छंद उड़ान भरना चाहता है । क्षितिज की ओर ताकते हुए, उसके पंख स्वर्णिम रश्मि से आलोकित होते, उसकी हर उड़ान में एक नया जुनून, हर लम्हा एक नई महक लिए होते। पलकें […]

शिव और शक्ति: एकत्व का परिवेश-कविता रचना -डॉ मुकेश

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 9, 2024 Poems 0

शिव समाधि हैं, शक्ति संचलन। एक निःशब्द ऊर्जा, दूसरी जीवंत स्पंदन। जब दोनों मिलते हैं, तब ब्रह्मांड बोल पड़ता है—सृष्टि का रहस्य, शिव-शक्ति की अद्वितीयता में छिपा है। यही जीवन की शाश्वत अभिव्यक्ति है।

“महादेव के चरणों में एक अर्पण: महाशिवरात्रि की पावन वेला की शुभकामनाएं “

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2024 Poems 0

सभी शिवभक्तों को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर असीम शुभकामनाएँ। इस शुभ घड़ी में, मैं आपके समक्ष एक सहज रूप से रचित काव्य प्रस्तुति, जो महादेव के चरणों में समर्पित है, लेकर आया हूँ। आशा है, यह रचना आपके हृदय को स्पर्श करेगी। कृपया ‘बात अपने देश की’ को सब्सक्राइब करने का कष्ट करें, और […]