डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 7, 2024
Poems
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गणेश चतुर्थी विशेष… करहूँ स्तुति श्री गणपति, दीन दुखी के नाथ। दारुण दूर करहुं, तुम हो दीनों के साथ॥ विघ्न विनाशक नाम तुम्हारा, शुभ करहुं हर बार। दीनदयालु, कृपा बरसाओ, जग में हो उजियार॥ करबो वंदन पारवती सुत की, मंगल मूर्ति विशाल। विघ्न विनाशक नाम तुम्हारो, सिद्धि दाता प्रतिपाल॥ मूषक वाहन, मोदक भोगी, भाल चंद्र […]
Mahadev Prashad Premi
May 1, 2024
हिंदी कविता
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जब रिश्तों में स्वार्थ और लोभ का ज़हर घुल जाता है, तब वर्षों से सहेजे संबंध भी टूटने लगते हैं। मनुष्यता की नींव पर जब निजी लाभ हावी हो जाता है, तो नाते सिर्फ समझौते बनकर रह जाते हैं। यह पंक्ति आज के स्वार्थी सामाजिक परिवेश की सच्चाई बयां करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 26, 2024
Poems
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अंतर्द्वंद का यह संसार, मन के विराट आकाश में, जहाँ चिंतन की गहराइयों में बसती है एक अनकही पीड़ा। मनुष्य की अनगिनत अपेक्षाएँ, समाज के मानदंडों के बीच, उलझती, घुलती, बिखरती, एक अनसुलझी पहेली की तरह। इस द्वन्द्व की गलियों में, जहाँ हर कदम पर एक नई दुविधा, मन के सिंहासन पर बैठा, एक अनदेखा, […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2024
Poems
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“तेरा दुःख तेरा ही होगा “इस कविता के माध्यम से, यथार्थ को अपनाने और स्वयं के साथ खड़े होने की प्रेरणा देने का प्रयास किया गया है। उम्मीद है, यह आपको अपने दुखों से लड़ने और जीवन की सच्चाइयों को स्वीकार करने की शक्ति देगा। जीवन की राहों में दुःख के कांटे जब भी बिछे […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 18, 2024
Book Review
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अहसास की इस विस्तृत वादी में, जहाँ कण कण में सुकून का सागर छिपा है,वहाँ एक परिंदा, अपने अस्तित्व की छाया में, स्वच्छंद उड़ान भरना चाहता है । क्षितिज की ओर ताकते हुए, उसके पंख स्वर्णिम रश्मि से आलोकित होते, उसकी हर उड़ान में एक नया जुनून, हर लम्हा एक नई महक लिए होते। पलकें […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 9, 2024
Poems
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शिव समाधि हैं, शक्ति संचलन। एक निःशब्द ऊर्जा, दूसरी जीवंत स्पंदन। जब दोनों मिलते हैं, तब ब्रह्मांड बोल पड़ता है—सृष्टि का रहस्य, शिव-शक्ति की अद्वितीयता में छिपा है। यही जीवन की शाश्वत अभिव्यक्ति है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 8, 2024
Poems
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सभी शिवभक्तों को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर असीम शुभकामनाएँ। इस शुभ घड़ी में, मैं आपके समक्ष एक सहज रूप से रचित काव्य प्रस्तुति, जो महादेव के चरणों में समर्पित है, लेकर आया हूँ। आशा है, यह रचना आपके हृदय को स्पर्श करेगी। कृपया ‘बात अपने देश की’ को सब्सक्राइब करने का कष्ट करें, और […]
Mahadev Prashad Premi
Feb 2, 2024
Poems
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कोरोना के दौर में जब कवियों की भीड़ ग़ज़लों को ‘वायरल’ करने में लगी है, कवि व्यंग्य में यही कामना करता है कि खुद कोरोना किसी पुराने रोग की तरह बीमार हो जाए। यह कविता महामारी पर मानवीय पीड़ा और हास्य का मिश्रित भाव प्रस्तुत करती है।
Mahadev Prashad Premi
Aug 4, 2021
हिंदी कविता
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दीपक मिट्टी का बना हो,या सोने का,रोशनी कितनी देता है,सवाल है इस वात का,कोई धनी हो या गरीव,मुसीवत में कितना हो करीव,महत्व है इस वात का,फूलों से महक,मेहनत भरी क्यारियों से ही आती है,क्रतिम फूलों से तो केवल,प्रदर्शनी ही लगाई जाती है।
Mahadev Prashad Premi
Jul 28, 2021
हिंदी कविता
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कहा जाता है समय और परिस्थिति सदैव पक्ष में हो ज़रूरी नहीं!हमारा नज़रिया जैसा होता है व्यवहार भी उसी तरह का होने लगता है | अंततः ये हमारे द्वारा किये जाने वाले सृजन को प्रभावित कर ही लेता है | लेखक ले कर आये है परिस्थितियों के अपने नजरिये को कविता के माध्यम से ‘ […]