डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 2, 2026
Self Help and Improvements
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Discipline arises from understanding and leads to freedom. Bondage arises from fear and takes freedom away. The difference lies not in rules themselves, but in whether they are chosen consciously or imposed unconsciously.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 1, 2026
English-Write Ups
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Free will is not the freedom to control the universe. It is the subtle power to choose between instinct and awareness, between falling into habit and rising toward truth. Within the cosmic order, your direction remains your responsibility.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 1, 2026
Self Help and Improvements
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झुकना हमेशा कमजोरी नहीं होता, पर भीतर से झुक जाना आत्म-द्रोह है। सच्चा सामंजस्य बाहरी संतुलन और भीतरी स्पष्टता के साथ जीना है—एडजस्ट करना, पर आत्म-सम्मान को गिरवी न रखना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 28, 2026
Lifestyle
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अकेलापन बीमारी नहीं, संकेत है—कि हम स्वयं से दूर हो गए हैं।”
“भीड़ में रहकर भी आदमी अकेला हो सकता है, और मौन में रहकर भी पूर्ण।”
“हम रिश्ते बनाते हैं—पर क्या हम स्वयं से भी रिश्ता बनाते हैं?”
“असली महामारी दूरी की है—दुनिया से नहीं, अपने ही अस्तित्व से।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 27, 2026
Self Help and Improvements
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हम अपने निर्णयों को स्वतंत्र मानते हैं, पर क्या वे सच में हमारे हैं? जब तक हम अपनी आदतों, भय और उधार की इच्छाओं को पहचान नहीं लेते, तब तक हम प्रतिक्रिया-प्रधान जीवन जीते हैं। जागरूकता ही वास्तविक स्वतंत्रता का प्रारंभ है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 26, 2026
Self Help and Improvements
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सत्य सिद्धांतों में नहीं, हमारे दैनिक व्यवहार और निर्णयों में प्रकट होता है। जब हम अपने जीवन को साक्षी भाव से देखना शुरू करते हैं, तब अनुभव ही हमारा शिक्षक बन जाता है और सत्य स्वयं स्पष्ट होने लगता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 26, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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अयोध्या हमारी पहचान है, लंका हमारी उपलब्धि।
धर्म इन दोनों के पार है—जहाँ साहस और विवेक मिलते हैं।
रामत्व अधिकार से बड़ा है, और सत्ता से मुक्त होने का नाम है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 25, 2026
Self Help and Improvements
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आत्म-प्रेम हर इच्छा पूरी करने का नाम नहीं, बल्कि अपने प्रति कठोर सत्यनिष्ठ होने का साहस है। जागरूकता ही वह शक्ति है जो हमें आत्म-भोग से ऊपर उठाकर वास्तविक विकास की ओर ले जाती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 24, 2026
Self Help and Improvements
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मनुष्य की पहचान उसके दावों से नहीं, उसके दैनिक चयन और प्रतिबद्धता से बनती है। हम जो निरंतर सोचते और साधते हैं, वही हमारे चरित्र और नियति को आकार देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 23, 2026
Self Help and Improvements
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प्रदर्शनप्रिय मन बाहरी स्वीकृति को ही जीवन का आधार बना लेता है। दिखावे की यह प्रवृत्ति भीतर की असुरक्षा को ढकने का प्रयास है। सच्ची स्वतंत्रता तब जन्म लेती है, जब हम तालियों से ऊपर उठकर अपने अंतरात्मा की स्वीकृति को महत्व देते हैं।