प्रदर्शनप्रिय मन और आंतरिक स्वतंत्रता की खोज

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 23, 2026 Self Help and Improvements 0

प्रदर्शनप्रिय मन बाहरी स्वीकृति को ही जीवन का आधार बना लेता है। दिखावे की यह प्रवृत्ति भीतर की असुरक्षा को ढकने का प्रयास है। सच्ची स्वतंत्रता तब जन्म लेती है, जब हम तालियों से ऊपर उठकर अपने अंतरात्मा की स्वीकृति को महत्व देते हैं।

पहचान का आईना: आप जो सोचते और साधते हैं, वही आप हैं

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 22, 2026 Self Help and Improvements 1

मनुष्य की असली पहचान उसके दावों से नहीं, बल्कि उसके मन में बसे विचारों, उसके चुने हुए लक्ष्यों और उसके समर्पण से बनती है। हम वही हैं, जिसे पाने के लिए हम समय और ऊर्जा अर्पित करते हैं।

शिक्षा विनम्र बनाती है — या हमने शिक्षा को ही छोटा कर दिया है?

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 20, 2026 Self Help and Improvements 0

शिक्षा विनम्र बनाती है — या हमने शिक्षा को ही छोटा कर दिया है? कहा जाता है—जितना आप शिक्षित होते हैं, उतना ही विनम्र, संवेदनशील और समझदार बनते हैं। शिक्षा केवल डिग्री का नाम नहीं, वह दृष्टि का विस्तार है। वह भीतर का अहंकार गलाकर मनुष्य को मनुष्य बनाती है। लेकिन प्रश्न यह है कि […]

शिव चतुर्दशी : शिव का अर्थ, शिवत्व का रहस्य और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 13, 2026 Culture 1

शिव केवल देवता नहीं, एक आंतरिक अवस्था हैं। मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त के पार जो शुद्ध प्रेम बचता है, वही शिवत्व है। शिव चतुर्दशी पर पढ़ें — शिव के वास्तविक अर्थ, निराकार-साकार स्वरूप और आत्मसाधना पर एक गहन विचार।

आज की समझ से कल की सुरक्षा तक – आपकी वित्तीय शिक्षा की पूरी यात्रा

badk_anushka Feb 9, 2026 Lifestyle 0

यह लेख व्यक्तिगत वित्त की बुनियादी लेकिन ज़रूरी समझ को सरल हिंदी में प्रस्तुत करता है। इसमें वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझने से लेकर कर्ज़ प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, निवेश रणनीति, कार और घर जैसे बड़े फैसलों तक—हर विषय को व्यवहारिक उदाहरणों के साथ समझाया गया है। यह लेख उन सभी के लिए है जो पैसे को तनाव नहीं, साधन बनाना चाहते हैं।

युवा शक्ति और राष्ट्र-निर्माण: भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 19, 2026 Self Help and Improvements 0

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा मन है—साहसी, आकांक्षी और साफ़ दिल वाला। राष्ट्र-निर्माण केवल सड़क-पुल नहीं, मूल्यों और चरित्र का निर्माण है। जब युवा सेवा, उद्यमिता और नीति-भागीदारी से जुड़ते हैं, तो भविष्य आकार लेता है।

बचपन : अनुशासन की पहली क़ैद या स्वतंत्रता का पहला उत्सव?

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 30, 2025 Lifestyle 0

हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।” “शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।” “थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।” “गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।” “जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”

महाभारत: भारत की सबसे पुरानी मैनेजमेंट हैंडबुक

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 23, 2025 India Story \बात अपने देश की 0

महाभारत सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि मानव-व्यवहार, नेतृत्व, रणनीति, कॉन्ट्रेक्ट-मैनेजमेंट, समय-निर्णय और टीम-डायनैमिक्स की सबसे पुरानी केस-स्टडी है। अर्जुन की जिज्ञासा, दुर्योधन का एटिट्यूड, युधिष्ठिर की गलतियाँ और कृष्ण की नेतृत्व-शैली, आज के किसी भी कॉर्पोरेट संगठन पर समान रूप से लागू होती हैं। महाभारत हमें सिखाती है कि प्रश्न पूछना बुद्धिमत्ता है, सही गेम चुनना स्ट्रेटेजी है, समय पर निर्णय लेना दक्षता है, और नेतृत्व का असली रूप प्रतिष्ठा नहीं, ज़मीन पर उतरकर सारथी बनना है।

गीता, धर्म और सफलता: स्वधर्म से करियर मैनेजमेंट तक

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 22, 2025 Lifestyle 0

श्रीमद्भगवद्गीता का पहला शब्द है “धर्म” और अंतिम “मम” – यानी पूरी कथा इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमती है कि “मेरा धर्म क्या है?” धर्म यहाँ मजहब नहीं, हमारे मूल गुण, स्वभाव और जिम्मेदारी का नाम है। जब हम भीड़ और ट्रेंड के पीछे भागकर अपना स्वधर्म छोड़ देते हैं, तब बाहर से सफल दिखकर भी भीतर से खाली रह जाते हैं। गीता हमें सिखाती है कि कर्म पर अधिकार रखो, फल को प्रसाद मानो, अपने स्वभाव के अनुरूप काम करो और आज के आनंदित कर्म में ही सच्ची “सफलता” खोजो।

भीतर का समुद्र-मंथन: विष से अमृत तक की आत्मिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 30, 2025 Culture 0

समुद्र-मंथन की कथा हमें बताती है कि जीवन की साधना सबसे पहले विष का सामना है—आलोचना, उपहास और असुविधा का। लेकिन यही विष जब धारण कर लिया जाए तो भीतर से रत्न प्रकट होते हैं—प्रतिभा, विवेक, गरिमा, समृद्धि और अंततः अमृत। यह कथा हमें याद दिलाती है कि हर संघर्ष एक नया जागरण है और भीतर की देवी ही हमारी असली शक्ति है।