गणेश चतुर्थी विशेष…
करहूँ स्तुति श्री गणपति, दीन दुखी के नाथ।
दारुण दूर करहुं, तुम हो दीनों के साथ॥
विघ्न विनाशक नाम तुम्हारा, शुभ करहुं हर बार।
दीनदयालु, कृपा बरसाओ, जग में हो उजियार॥
करबो वंदन पारवती सुत की, मंगल मूर्ति विशाल।
विघ्न विनाशक नाम तुम्हारो, सिद्धि दाता प्रतिपाल॥
मूषक वाहन, मोदक भोगी, भाल चंद्र विराज।
करबद्ध हम विनय करत हैं, हरहु संकट, आज॥
जय गजानन बिनवत हम सब, सुनहु अरज पुकार।
तुमसे ही जग में शुभ मंगल, तुम्हरी जय जयकार॥
बुद्धि विवेक के दाता तुम हो, करहु कृपा अभिराम।
जन-जन के सब संकट काटो, होवे मंगल काम॥
दीन-दुखारी तुम ही उबारो, विनती सुनहूँ हमार।
तुम बिन काज सफल ना होवे, तुमसे जगत सुखार॥
विघ्न हरो हे गणपति वंदित, सुनहु कृपा से बात।
भव सागर से पार लगाओ, तुम ही सुखद प्रभात॥
एकदन्त विघ्नहर्ता हो तुम, महिमा अपरंपार।
रिद्धि-सिद्धि संग चलत सदा ही, तुम हो सबके प्यार॥
गौरीपुत्र, गजानन वंदन, करहुं विनीत साभार।
करुणामय, तुम रहो सहायक, सुमिरन बारम्बार॥

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