हाथ से उड़ते तोते

डॉ प्रेमचंद द्वितीय

महानगर इंदौर के रानी सराय परिसर में तोतों के आशियानों को उजाड़ कर मेट्रो स्टेशन बनाने की पहल को लेकर मेट्रो के अधिकारी के बयान कि ,,तोतों का क्या है, वह आज इस पेड़ पर तो कल उसे पेड़ पर ! वे कहीं भी उड़ कर बैठ जाएंगे ,,तोतों के लिए इतना बड़ा प्रोजेक्ट रिजेक्ट नहीं किया जा सकता ।यह खबर पढ़ कर पं शिवनारायण जी मॉर्निंग वॉक के दौरान बोले कि तोतो के आशियानों को उजाड़ने वाले के हाथ के तोते उड़ते हैं जब वह लोगों से लेकर तोतों के आशियानों पर हाथ डालते हैं ।वे बोले वैसे भी तोतों ने अब जंगल के पेड़ों से अपना बसेरा हटाकर नगरों के बचे कूचे पेड़ों पर अपना डेरा जमा रखा है ।वह समूह में जब सांझ को कलरव और चीची करते हुए जंगल से सफर कर लौटते हैं तब तोतों की आमद से नगरों में लगता है गोधूलि बेला आ गई है और वरना महानगरों में गायों का न होना और आवारा पशु में उसे सम्मिलित करने के बाद गोधूलि के लिए न तो गाये बची है नहीं उसके आने पर उड़ती रज या धूल दिखती है ।इस कारण गोधूलि के विकल्प का अंदाजा है इन तोतों और अन्य परिंदों के कलरव और उनके आशियाने में आने पर लगता है। इस पर रामनिवास जी बोले अरे जो अफसर कहते हैं कि तोतों का क्या वे कहीं भी उड़ कर बैठ जाएंगे ,लेकिन उन्हें नहीं मालूम है कि तोते जिस पेड़ पर अपना डेरा जमाते हैं उस पेड़ को कोई उजाड़ता है तो तोते अपने आशियाने की जगह जाने पर रोष जाहिर करते हैं और आसपास के बिजली के तारों पर कतारों में राते गुजरकर अलग ही संदेश देते हैं । वैसे भी तोतों को समूह में रहना पसंद है और इस संगठन के बल पर वह अपनी प्रजाति को बचाने में सफल है वरना जीव दया और पर्यावरण के साथ फोटो सेशन वाले इंसान कभी भी उन्हें गिद्द जैसी लुप्त प्रजातियों में धकेल देते ।इस पर सुनील भैया बोले अरे तोतों को आशियाना तोड़ने वालों तोते से सामाजिकता सीखो । तोता ही इंसानों की आवाज और उनकी बोली की नकल कर सकते हैं दूसरे कोई भी परिंदे पशु इस आर्टिफिशियल बनावटी इंसान की आवाज की नकल नहीं कर सकते हैं तोता ही ऐसे पक्षी है जो इंसान की फितरत और बोली आदि को जानते हैं ।वह बोले इसी कारण अमीर खुसरो को तूती ए हिंद ,यानी हिंदुस्तान का तोता उपाधि तोतों की वजह से मिली है ।जब तूती की बात निकली तो नरेंद्र स्वामीजी बोले तोता ही नहीं तूती का भी बोलबाला है, तूती छोटी प्रजाति जरूर है लेकिन उसकी धार इतनी है कि प्रभाव के लिए तूती बोलने का ही उपयोग किया जाता है। वर्तमान में जिसकी एक बार तूती बोल जाती है वह सररमायेदार और प्रभावशाली की गिनती में आ जाता है। लेकिन इसके ठीक विपरीत नक्कार खाने में तूती की आवाज से भी कानों में जूं न रेंगना साधारण व्यक्ति की ही नहीं सिस्टम के लिए चुनौती होती है ।तोता और तूती एक ही परिवार है दोनों ही अकलमंद और तुरंत सिखाने वाले है मात्र तूती के बल पर ही कइयों की तूती बोलती है। मंत्री जी के पीए ,साहब के असिस्टेंट ,व्यापारी के मुनीम और मुकट दम ,किसान के जराती ,अभिनेत्री की सुंदरता, अभिनेता के डायलॉग, पहलवान के दाव की तूती जब बोलती हैं तो अच्छे-अच्छे की नानी याद आ जाती है ।इसके ठीक विपरीत जब नक्कारखाने में तूती की आवाज नहीं सुनी जाती है तब तूती नहीं बोलती है और तू तू में में… हो जाती है।


जब तोता तूती की बात चली तो निवान भाई बोले अरे तोते हमारे मल्टी के सामने पेड़ पर हैवी ट्रैफिक के बाद भी में बेखौफ होकर बैठते हैं और ट्रैफिक जाम का नजारा देखते हैं ।और ये तोते बैठे-बैठे सोचते हैं कि यह इंसान कितने खुदगर्ज है कि आने जाने वालों के रास्ते अपने वाहन से रोकते हैं ।ट्रैफिक को जाम करते हैं ।ये तोते शहनाई की गूंज ,ढोल धमाके, पटाखे शोरगुल,भीड़भाड़ , माइक और यहां तक के डीजे की आवाज की खौफ से भी बेखौफ रहते हैं और अपने स्थान पर आकर ही अपनी रातें गुजारते हैं और सुबह दाना पानी के लिए चले जाते हैं । हाथ से तोते उड़ने और सरकारी नक्कार खाने में तूती नहीं बोलने का मुहावरावाद जब मॉर्निंग वॉक में चला तो अजय लोडिंग लोड लेते हुए बोले हम भी मॉर्निंग वॉकिंग के दौरान तोता मैना की तरह यानी फालतू ही चर्चा करते हैंl हमारी कॉलोनी का विपुल तोते की तरह रट रट कर आय ए एस बन गया तब लोगों को लगा कि तोते की रट कितनी महत्वपूर्ण है ।और जिसने तोते की तरह रटा नहीं ,उसके हाथ के तोते उड़ गए ।अरे कॉलोनी के गजराज के हाथ में क्या लगी लोग कहने लगे कि हाथ में क्या तोता पाल लिया है । तोतों का बदलने की प्रवृत्ति में भी बहुत बड़ा योगदान है तोतों की तरह आंखें बदलना तोते की तरह दीदे बदलना ऐसी प्रवृत्तियों को तोतों ने इंसानों को दे दी और इंसान इसमें उलझ गया और तोते फ्री हो गए ।
तोतों का राजनीति में हस्तक्षेप तब माना जाता है जब नेता के हाथ से तोते उड़ जाते हैं लेकिन तोतों के पास वह अद्भुत दूर दृष्टि भी है जो इंसान नहीं देख सकते है ।


तोतो की तरह रटने की कला से अनेक आर्टिस्ट बन गए तो कई तोते उड़ने के कारण उनकी जिंदगी में ट्विस्ट आ गया और फिसड्डी हो गए। जो तोता पिंजरे में रहते हैं वे ज्योतिषी भी है। तोते औरों का भविष्य बता कर अपना भविष्य पिंजरे में कैद कर लेते हैं ।इसलिए तोते बहुत कुछ है, तोते वोकल नहीं है क्योंकि उनके पास वोकल कार्ड नहीं है ।लेकिन लोकल जरूर है । अफसरों को उस वक्त तोतों का वजूद पता चलेगा जब जब उनके हाथ से प्रोजेक्ट के तोते उड़ जाएंगे और नक्कारखाने में तूती की आवाज सुनी जाएगी !

Prem Chand Dwitiya

Prem Chand Dwitiya

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म…

Address 34 पत्रकार कॉलोनी बडनगर 456 771 जिला उज्जैन म प्र है

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