हुक्का-गीत

चौपाल के बीच
बैठा है हुक्का
बिन गुड गुडाये
मिट्टी का,
दरारों से भरा,
पर स्मृतियों से लबालब।

उसकी चिलम में
तंबाकू नहीं,
इतिहास भरा है—
सुलगता हुआ,
धीमे-धीमे
सदियों का धुआँ छोड़ता।

हुक्का गुनगुनाता है—
कोई लोकगीत नहीं,
यह जाति का गीत है शायद ,
जिसकी तान
जन्म के पहले
कान में डाल दी जाती है।

सुनो ज़रा कान लगाकर –
जन्म हुआ,तो नाम मिला,नाम के साथएक पूँछ मिली…”

मुझे हाँ

पूँछ—
जो पीछे-पीछे चलती है,
कभी झंडा बन जाती है,
कभी फंदा।
उसी पूँछ से
कोई नाक पर मक्खी उड़ाता है,
और कोई
दूसरे का गला कस देता है।

हुक्का कहता है—
मैंने देखा है,
जब आदमी
 सिर्फ आदमी नहीं था,
जाति का बहाना था।
मैंने देखा है
हुक्का-पानी बंद होने पर
जीवित शरीरों का
सामाजिक दाह-संस्कार।


जिसका हुक्का,उसी की हवा,बाक़ी सबसिर्फ़ साँस लेते अपराधी…”

फिर एक दिन
मुझे चौराहे पर रख दिया गया।
सबने गुड़गुड़ाया—
बिना पूछे,
बिना झुके।
मुझे लगा
शायद आदमी बड़ा हो गया है।

पर मैं ग़लत था।

अब मैं फिर
घरों में बाँटा जा रहा हूँ—
हर जाति को
अलग-अलग हुक्का।
कहा जा रहा है—
“तुम्हारा धुआँ सबसे शुद्ध है।”


“धुएँ के रंग अलग सही,पर आँखों की जलन एक-सी…”

राजनीति ने
मेरी चिलम संभाल ली है।
वोट की आग से
मुझे सुलगाया जाता है।
जिसे टिकट चाहिए,
वह पहले पूछता है—
“मेरे कितने हुक्के हैं?”

मैं हुक्का हूँ,
पर द्रवित हूँ।
मुझे डर है—
कि एक दिन
मेरी गुड़गुड़ाहट
किसी की चीख़ पर भारी पड़ जाएगी।


अगर धुआँ ही सब कुछ है,तो आग किसके घर लगेगी?”

मैं चाहता हूँ—
कि कोई
मुझे बुझा दे।
पूँछ काट दे,
चिलम खाली कर दे।
मुझे फिर
सिर्फ़ एक वस्तु बना दे,
प्रतीक नहीं।

क्योंकि
जिस दिन आदमी
हुक्के से ऊपर उठेगा,
उसी दिन
गीत बदलेगा—
और धुआँ
हवा बन जाएगा।

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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