पद पाकर ,नामी ,बनने वालों की सुनामी !
डॉ प्रेमचंद द्वितीय
वैसे भी पदों का अपना खासा वजूद है ।दुर्लभ मनुष्य जीवन में जन्म लेने वाला हर मनुष्य चाहता है कि उसे कोई न कोई पद मिले। पहले पद प्राप्त करने वाले अखबारों की सुर्खियों में छाए रहते थे, लेकिन जब से मुंआ सोशल मीडिया चौपाल , चूल्हे चौके से लेकर बेडरूम तक पहुंचा हर व्यक्ति अपने पद को इन स्थानों पर पहुंच कर ही सांस लेता है।, पद, भी अनोखे होते हैं ,वे मिलते हैं ,वे खींचे और छीने जाते हैं ।पद मिलने पर व्यक्ति के तेवर बदल जाते हैं। और पद छीने जाने या हटने हटाने पर व्यक्ति के चेहरे की हवा गुब्बारे की हवा की तरह निकल कर चेहरे की हवाईयां उड़ जाती है ।वैसे तो पद छोटा हो या बड़ा सभी महत्वपूर्ण है ।लेकिन जब समूह में पदधारियों के फोटो छपते हैं या वायरल होते तो लगता है कि पद की कीमत कौड़ियों के माल है लेकिन कुछेक पद ही चर्चा में आते हैं तो वे अमूल्य माने जाते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों में पद की चर्चा चल रही थी कि पं शिवनारायण जी आ टपके और बोले पद की माया ही अनोखी है ।पद मद ला देता है। एक बहुत बड़े समाज में जब पद बटने लगे तो जिन्हें पद मिल गया वे तो खुश हो गए लेकिन जिन्हें नहीं मिला उन्होंने संगठन के पद यानी टांग ही तोड़ दी और अखिल भारतीय लेवल पर दो-तीन संगठन बना लिए और विभिन्न संगठनों के जरिए एक ही पद पर दो दो तीन तीन पदाधिकारी बना दिए । अब खंडित संगठन के जरिए बंटे पद के बाद समाज का कोई भी व्यक्ति पद रहित नहीं था। मानो पद से नामी बनने वालों की सुनामी आ गई हो !
अब जिस समाज का संगठन अखिल भारतीय लेवल पर अपनी साख रखता था , उसका हर व्यक्ति पद से युक्त था ।पदों के वितरण के बाद हर पदाधिकारी अपने नाम को सुर्खियों लाने के लिए प्रयासरत था ।कई सार्वजनिक समारोह में तो एक ही पद पर तीन-तीन चार चेहरे देखने पर लोग कहने लगे थे कि एक ही पद पर तीन चार लोग और जो नामी बनने के लिए पद लाए थे उनके पद नीलामी की सीमा में आ गए थे।
पदों की नीलामी की बात सुनकर सुनील भैया बोले चाहे राजनीतिक संगठन हो,या सामाजिक हो ,व्यापारिक हो, कारोबारी हो ,जाति समाज का हो, सरकारी संस्थाएं प्राइवेट सार्वजनिक संगठन हो, या किसी भी वर्ग का, किसान ,युवा महिला वरिष्ठ नागरिक स॔गठन हो या सरकारी कर्मचारी हो या रिटायरों का संगठन हो हर जगह पदो की मारामारी है। और पदों की इस मारामारी से हर संगठन सक्रिय हो गए हैं और पदाधिकारी पद प्राप्त करने के बाद अपना रुतबा कायम करने के लिए जी जान से जुटे हैं ।
इस भी राजनीतिक रुझान वाले कनीश जी बीच में बोल पड़े क्यों पदों की बातचीत के पीछे पड़े हो ,पद तो अर्थ के पीछे है ।जब उपस्थित लोग अर्थ और पद के कॉन्टैक्ट को नहीं समझ सके तो कनीश जी बोले अरे पद तो पैसे से मिलते हैं। पद बिकते हैं पद खरीद खरीदे जाते हैं। एक ही पद के खरीदार ज्यादा ज्यादा होते हैं पद के मूल्य का सेंसेक्स की तरह एकदम उछाल मार जाते है ।और सड़ा सा पद महंगे दाम पर बिक जाता है ।वे बोले किस्म किस्म के पदों को खरीद कर सबरवाल जी पदों को चांदी के जूते से मिलने का कहकर निश्चिंत रहते हैं ।जब पद बटते हैं तो वे पद यानी चरण में चांदी के जूते पहनाकर पद हथिया लेते हैं।
पदों की चर्चा पर धार्मिक रुझान रखने वाले पेमपुरी जी बोले अरे पद का अर्थ चरण भी होते हैं और जहां संतन के पैर पड़े वहां बंटाधार भी होता है ।वहीं किसी संत महात्मा के चरण पाना किसी बड़े पद से ज्यादा प्रभावी होते हैं ।इस पर राजनीति के नोसिखीए अखिलेष जी बोले अरे बड़े नेता के चरण पकड़ लिए जाते हैं तो पद तो दौड़े चले आते हैं।
कई नेता तो अपने चरण टेबल के बाहर लटका कर बैठे हैं ताकि पद प्राप्त करने वालों को पद छूने के लिए पदों को टटोलना न पड़े ।
इस पर हाल ही में नौकरी से रिटायर हुए मदन लाल जी बोले पद का मतलब नौकरी और दबदबा ,ओहदा भी होता है ।हमारे एक साब थे ,वे पद के लिए बड़े साब के पदों में साष्टांग गिरते थे इस कारण उन्हें समय के पहले प्रमोशन का पद मिल गया और पद पाकर पोजीशन बनाली। साहित्यिक रुझान वाले खिलावन जी बोले अरे राजनीति ,नौकरी के पद से बड़े सुरदास, तुलसीदास के पद बड़े हैं इन पदों के आगे सारे पद बौने है ।तब युवा निवान भाई बोले अरे पद सब कुछ तो है ,पद स्टेटस सिंबल भी है ,पद से प्रतिष्ठा मिलती है श्रेणी मिलती है ,बगैर पद के समाज में कोई गिनती नहीं होती है और पद के स्टेटस से व्यक्ति समाज को झुका देते हैं। इस पर नरसिंह जी बोले अरे पद चरण तो होते ही है पग टांग ,पांव और पैर भी होते हैं और पद को प्राप्त करने के लिए कई फटे में पैर फ॔सा देते हैं और फंसे हुए पैर यानी पद पद दिलाने में सफल हो जाते हैं ।
अंग्रेजी स्कूल से निकले निखिल जी बोले अरे पद पोस्ट भी होती है पोस्ट से केटेगरी और ग्रेड भी मिलती है और रेंग रेंग कर जीने वाला पोस्ट ,पाकर रैंक पा लेता है और ओहदा और पोजीशन पा लेता है ।पदों की महिमा के बखान से आजीज शरद जी जाते-जाते बोले मात्र पद ही ऐसे हैं जो ,नामी, बनने का जलवा रखते हैं इसीलिए तो पदों के लिए लोग एक दूसरों को टांग अड़ा कर पदों को झपट लेते हैं ।जय हो पदों की !
, ,– –
Comments ( 0)
Join the conversation and share your thoughts
Comments are closed for this post.
No comments yet
Be the first to share your thoughts!