राष्ट्र निर्माण हेतु आत्म अवलोकन-बदलता परिवेश भटकते युवा
राष्ट्र निर्माण में कहीं न कहीं हमें युवा पीढ़ी को सन्मार्ग की ओर लगाने के लिए आत्म अवलोकन करना जरूरी है ,और आत्म अवलोकन कर श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रण लेना पड़ेगा
India Ki Baat
राष्ट्र निर्माण में कहीं न कहीं हमें युवा पीढ़ी को सन्मार्ग की ओर लगाने के लिए आत्म अवलोकन करना जरूरी है ,और आत्म अवलोकन कर श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रण लेना पड़ेगा
जिस तरह कोरोना महामारी एक विकराल रूप लेकर पूरे विश्ब को चुनोती दे रही है ,उस से पूरा मानव समाज में जो मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा उसकी कल्पना मात्र से ही मन सिहर उठता है.
जिस तरह से कोरोना खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है उस से तो शायद येही लगता है हमे अब इस कोरोना रुपी राक्षस के साथ जी लेने की आदत डाल लेनी चाहिए . यु तो विश्ब भर में इस महामारी को खत्म करने के अथक प्रयास किये जा रहइ है फिर भी ऐसा लगता है जैसे यह बीमारी विश्ब में कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं होगी
World Telecom Day is celebrated on 17 th May all around the world. The significance of this day is special for India because connecting such a large population of India with this Tele revolution has brought an unprecedented change in the life of people. Though there is a positive and negative aspect of every new invention, we cannot deny the revolution of telecommunication. Let's talk about some interesting facts which are associated with India on this day.
मेरी कविता "मिटा कभी कोई" व्यक्ति के सहस और विवेक की बात करती है की कैसे एक व्यक्ति सहस और विवेक से साधन हीन होते हुए भी कर्मशील बन जाता है और जीवन में सफल हो सकता है.
आइये जानते हैं दाल बाटी चूरमा का अविष्कार क्यों, कहाँ, कब और कैसे हुआ :– आप अगर राजस्थान के निवासी है तो स्वाभाविक है इस राजस्थानी व्यंजन के नाम से आपका बचपन से ही पाला पडा है. मूलतः राजस्थान का यह व्यंजन अब विश्ब भर में अपनी धूम मचा रहा है. ये भी पढ़े बाटी […]
In the Corona era, when the whole of humanity is going through a crisis, the importance of the family is becoming clear. In this period, more time has been spent among the family. The migrant laborers who have gone to work outside are also reaching their homes. It shows that in the time of crisis, we remember only and only home.
गाँवो में दिखता शीर्षक कविता गाँव के परिद्रश्य को दर्शाती ,आज भी गाँवो को शहरो से श्रेष्ठ होने का आभास कराती है.
सुप्र्शिद्ध कवी महादेव प्रेमी द्वारा संकलित एवं रचित प्रथम पुस्तक बुझोबल को समर्पित यह रचना
Many situations, One description. Interpretation is all yours. an untitled poem by Dr. Sanjay Jain